हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2026: मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ फिर नंबर वन एक गौतम अदाणी, जानें देश में कितने अरबपति
गौतम अदाणी 9.23 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2026 में फिर शीर्ष पर पहुंच गए हैं। जानिए देश के 391 अरबपतियों, एआई-टेक सेक्टर के नए चेहरों और सेल्फ-मेड धनवानों से जुड़ी पूरी रिपोर्ट।
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एम3एम हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2026 के अनुसार, अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी और उनका परिवार एक बार फिर देश के सबसे अमीर कारोबारी बन गए हैं। उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और उनके परिवार को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है।
13 फीसदी की सालाना वृद्धि के साथ गौतम अदाणी की कुल संपत्ति 9.23 लाख करोड़ रुपये (96 अरब डॉलर) तक पहुंच गई है, जबकि मुकेश अंबानी की संपत्ति में 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह 8.63 लाख करोड़ रुपये (90 अरब डॉलर) रह गई है। इसके साथ ही गौतम अदाणी ने मुकेश अंबानी पर 59,400 करोड़ रुपये की बढ़त बना ली है। दूसरी ओर, भारतीय अर्थव्यवथा की मजबूती के बीच देश में डॉलर आधारित अरबपतियों की संख्या बढ़कर रिकॉर्ड 391 के स्तर पर पहुंच गई है।
हुरुन इंडिया रिच लिस्ट कौन से बड़े आंकड़े सामने आए हैं?
हुरुन की इस नई सूची में कम से कम 1,000 करोड़ रुपये की व्यक्तिगत संपत्ति वाले कुल 1,810 व्यक्तियों को शामिल किया गया है। इन सभी अमीरों की संयुक्त संपत्ति पिछले वर्ष की तुलना में 12.8 प्रतिशत बढ़कर 187.5 लाख करोड़ रुपये (1.96 ट्रिलियन डॉलर) हो गई है, जो भारत की कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग आधे के बराबर है। देश में पिछले पांच वर्षों में डॉलर अरबपतियों की संख्या 237 से बढ़कर 391 हो गई है, जिसमें अकेले पिछले एक साल में 27 नए डॉलर अरबपति जुड़े हैं।
सूची में शामिल व्यक्तियों की औसत संपत्ति बढ़कर 10,362 करोड़ रुपये पहुंच गई है और इस समूह ने रोजाना औसतन 5,833 करोड़ रुपये की दर से अपनी संपत्ति में इजाफा किया है। संपत्ति के संकेंद्रण की बात करें तो 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक संपत्ति वाले 23 अमीर सूची की कुल संपत्ति का 28.9 प्रतिशत हिस्सा नियंत्रित करते हैं।
टॉप 10 सूची में कौन से नए नाम उभरे हैं और किस सेक्टर का दबदबा?
शीर्ष 10 अमीरों की सूची में आर्सेलरमित्तल के एलएन मित्तल और परिवार आठ पायदान चढ़कर तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं, जिनकी संपत्ति 93 फीसदी बढ़कर 3.39 लाख करोड़ रुपये हो गई है। मित्तल ने इस सूची में सबसे ज्यादा 1.64 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध संपत्ति जोड़ी है। वेदांता रिसोर्सेज के अनिल अग्रवाल और उनका परिवार सात स्थान की छलांग लगाकर 2.08 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ नौवें स्थान पर आ गए हैं। वहीं, टॉरेंट फार्मास्यूटिकल्स के समीर मेहता और परिवार जेबी केमिकल्स के विलय के बाद 1.89 लाख करोड़ रुपये के साथ 10वें स्थान पर प्रवेश कर चुके हैं। सेक्टर की दृष्टि से इंडस्ट्रियल प्रॉडक्ट्स (166), केमिकल्स (142) और फार्मास्यूटिकल्स (136) सबसे बड़े वेल्थ क्रिएटिंग सेक्टर बनकर उभरे हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे नए क्षेत्रों का क्या योगदान है?
इस वर्ष की हुरुन सूची में तकनीकी नवाचार और न्यू-एज सेक्टर्स का बड़ा प्रभाव देखा गया है। बेंगलुरु स्थित क्यूपीएआई के नागेंद्र नागराजा 1,700 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ सूची में शामिल होने वाले देश के पहले क्वांटम कंप्यूटिंग उद्यमी बने हैं।
इसके अतिरिक्त, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने एक अलग सेक्टर के रूप में प्रवेश किया है, जिसमें 19 प्रतिनिधियों की कुल संपत्ति 3.07 लाख करोड़ रुपये दर्ज की गई है। इनमें से 15 नए प्रतिनिधि हैं। एरोस्पेस और डिफेंस सेक्टर से भी 23 नए नाम जुड़े हैं, जिनकी कुल संपत्ति 85,200 करोड़ रुपये है। एआई कंपनी विस्प्र फ्लो के 28 वर्षीय संस्थापक तनय कोठारी और सहज गर्ग 4,200-4,200 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ सूची में शामिल हुए हैं।
महिलाओं, युवाओं और सेल्फ-मेड वेल्थ क्रिएटर्स का प्रदर्शन कैसा रहा है?
हुरुन सूची के 70 प्रतिशत सदस्य यानी रिकॉर्ड 1,266 उद्यमी 'सेल्फ-मेड' (स्वयं के दम पर अमीर बने) हैं, जबकि पांच साल पहले यह आंकड़ा 55 प्रतिशत था। जेप्टो के 23 वर्षीय संस्थापक कैवल्य वोहरा सूची के सबसे युवा अमीर हैं, जबकि उनके सह-संस्थापक आदित पालिचा (24 वर्ष) दूसरे सबसे युवा अमीर बने हैं। क्यूपिड के आदित्य कुमार हलवासिया 859 फीसदी की संपत्ति वृद्धि (18,800 करोड़ रुपये) के साथ सबसे तेज वेल्थ क्रिएटर बने हैं।
महिलाओं की भागीदारी बढ़कर 131 हो गई है, जिनमें से 33 डॉलर अरबपति हैं। एचसीएल की रोशनी नादर मल्होत्रा (2.79 लाख करोड़ रुपये) देश की सबसे अमीर महिला हैं और वे समग्र रैंकिंग में पांचवें स्थान पर हैं।
हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2026 यह स्पष्ट दर्शाती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में पारंपरिक विनिर्माण और बुनियादी ढांचे के साथ-साथ एआई, डिफेंस और टेक आधारित नए स्टार्टअप्स से धन सृजन की गति तेज हुई है। 70 प्रतिशत सेल्फ-मेड उद्यमियों की उपस्थिति और 106 भारतीय शहरों में फैले अमीरों के आधार से यह साबित होता है कि भारत में संपत्ति का निर्माण अब केवल पारंपरिक मेट्रो शहरों या वंशानुगत घरानों तक सीमित नहीं रहा है।