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Shimla News: राजधानी में 1852 में बनी ढली टनल का होगा जीर्णोद्धार, सरकार को भेजा प्रस्ताव
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अमर उजाला असर...
शहरी विधायक हरीश जनारथा ने सरकार को भेजा टनल को मजबूती देने का प्रस्ताव
एचपीआरआईडीसी ने तैयार की है इसकी डीपीआर, नई बनने के बाद साल 2022 बंद है पुरानी टनल
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान साल 1852 में बनी राजधानी की सबसे पहली ढली टनल का अब जल्द जीर्णोद्धार हो सकता है। करीब 174 साल पुरानी इस टनल के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया गया है। सरकार से बजट को मंजूरी मिलते ही इसके जीर्णोद्धार का काम शुरू हो जाएगा। इस टनल को मजबूती देने के लिए 4.50 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। हिमाचल प्रदेश रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने यह प्रोजेक्ट तैयार किया है। पहले इसकी डीपीआर लोक निर्माण विभाग को भेजी गई थी। हालांकि, विभाग के पास इसके लिए बजट उपलब्ध नहीं हो पाया। ऐसे में अब सरकार से इसके लिए बजट मांगा जा रहा है।
ढली में बनी यह टनल साल 2022 में नई डबललेन टनल खुलने के बाद से बंद पड़ी है। यह फिलहाल डंपयार्ड में बदल चुकी है। टनल के दोनों छोर आवाजाही के लिए बंद हैं। इसके बाहर गाड़ियां खड़ी हो रही हैं। टनल नशेड़ियों का भी अड्डा बन रही है। सरकार ने इस टनल के जीर्णोद्धार के लिए योजना बनाने के निर्देश दिए थे। डीपीआर तैयार करने से पहले इस टनल का एक नामी कंपनी से सर्वेक्षण करवाया गया है। कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिए हैं कि टनल के भीतर किस तरह का काम होना जरूरी है, कैसे इसकी दीवारों को मजबूती दे सकते हैं, पानी का रिसाव कैसे बंद किया जा सकता है। अभी टनल में दीवारों से लगातार पानी रिस रहा है। पानी के साथ मिट्टी भी टनल के भीतर पहुंच रही है। शहरी विधायक हरीश जनारथा ने कहा कि टनल के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। जल्द ही इसके लिए बजट उपलब्ध करवाया जाएगा।
मेजर ब्रिग्स ने बनवाई थी ढली टनल
राजधानी शिमला को ऊपरी शिमला से जोड़ने के लिए ब्रिटिश शासनकाल के दौरान मेजर ब्रिग्स ने इस टनल का काम शुरू करवाया था। साल 1850 में इसका निर्माण शुरू हुआ था जो 1852 में विंटर सीजन के दौरान पूरा हुआ। यह टनल सिंगल लेन है जिसके चलते एक समय में एक तरफ से ही वाहनों की आवाजाही होती थी। दशकों तक यह टनल शिमला की सबसे अहम टनल रही। इसका निर्माण भी दशकों बाद मजबूत है। हालांकि, अब दीवारों से पानी रिस रहा है। इसे रोका जा सकता है जिसका अब काम होना है।
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शहरी विधायक हरीश जनारथा ने सरकार को भेजा टनल को मजबूती देने का प्रस्ताव
एचपीआरआईडीसी ने तैयार की है इसकी डीपीआर, नई बनने के बाद साल 2022 बंद है पुरानी टनल
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान साल 1852 में बनी राजधानी की सबसे पहली ढली टनल का अब जल्द जीर्णोद्धार हो सकता है। करीब 174 साल पुरानी इस टनल के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया गया है। सरकार से बजट को मंजूरी मिलते ही इसके जीर्णोद्धार का काम शुरू हो जाएगा। इस टनल को मजबूती देने के लिए 4.50 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। हिमाचल प्रदेश रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने यह प्रोजेक्ट तैयार किया है। पहले इसकी डीपीआर लोक निर्माण विभाग को भेजी गई थी। हालांकि, विभाग के पास इसके लिए बजट उपलब्ध नहीं हो पाया। ऐसे में अब सरकार से इसके लिए बजट मांगा जा रहा है।
ढली में बनी यह टनल साल 2022 में नई डबललेन टनल खुलने के बाद से बंद पड़ी है। यह फिलहाल डंपयार्ड में बदल चुकी है। टनल के दोनों छोर आवाजाही के लिए बंद हैं। इसके बाहर गाड़ियां खड़ी हो रही हैं। टनल नशेड़ियों का भी अड्डा बन रही है। सरकार ने इस टनल के जीर्णोद्धार के लिए योजना बनाने के निर्देश दिए थे। डीपीआर तैयार करने से पहले इस टनल का एक नामी कंपनी से सर्वेक्षण करवाया गया है। कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिए हैं कि टनल के भीतर किस तरह का काम होना जरूरी है, कैसे इसकी दीवारों को मजबूती दे सकते हैं, पानी का रिसाव कैसे बंद किया जा सकता है। अभी टनल में दीवारों से लगातार पानी रिस रहा है। पानी के साथ मिट्टी भी टनल के भीतर पहुंच रही है। शहरी विधायक हरीश जनारथा ने कहा कि टनल के जीर्णोद्धार का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। जल्द ही इसके लिए बजट उपलब्ध करवाया जाएगा।
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मेजर ब्रिग्स ने बनवाई थी ढली टनल
राजधानी शिमला को ऊपरी शिमला से जोड़ने के लिए ब्रिटिश शासनकाल के दौरान मेजर ब्रिग्स ने इस टनल का काम शुरू करवाया था। साल 1850 में इसका निर्माण शुरू हुआ था जो 1852 में विंटर सीजन के दौरान पूरा हुआ। यह टनल सिंगल लेन है जिसके चलते एक समय में एक तरफ से ही वाहनों की आवाजाही होती थी। दशकों तक यह टनल शिमला की सबसे अहम टनल रही। इसका निर्माण भी दशकों बाद मजबूत है। हालांकि, अब दीवारों से पानी रिस रहा है। इसे रोका जा सकता है जिसका अब काम होना है।
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