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रिसर्च में खुलासा, डिप्रेशन के मरीजों को हो सकती है यह बीमारी

Mon, 22 Aug 2016 10:50 AM IST
शिमला/अमर उजाला, शिमला
शिमला/अमर उजाला, शिमला Updated Mon, 22 Aug 2016 10:50 AM IST
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Depression patients may suffer from diabetes

अगर आपको सामान्य तौर पर तनाव या डिप्रेशन रहता है तो इसे नजरंदाज न करें। हिमाचल के वाकनाघाट स्थित जेपी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने हाल ही में किए शोध में पाया है कि डिप्रेशन की वजह से डायबिटीज का खतरा काफी बढ़ जाता है। अगर ये दोनों बीमारियां एक साथ होती हैं तो यह किसी भी मरीज के लिए बेहद खतरनाक हो सकती हैं।

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शोध से जुड़े यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ फार्मेसी के डॉ. एम उदयभानु ने बताया कि आमतौर पर लोग डिप्रेशन को अनदेखा करते हैं। इसकी वजह से दिमाग के हिप्पोकैंपस में ग्लूकोज ट्रांसपोर्ट टाइप 4 के मेम्ब्रेन को नुकसान पहुंचता है। इसका ट्रीटमेंट करना बेहद मुश्किल होता है। ऐसे में डिप्रेशन के इलाज के दौरान डायबिटीज से जुड़ी दवाओं को जरूर लेना चाहिए।
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उदयभानु ने कहा कि रिसर्च के दौरान यह बात सामने आई है कि डायबिटीज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा रोजीग्लिटाजोन के  इस्तेमाल से दोनों ही बीमारियों से काफी हद तक उबरा जा सकता है। इस शोध में डॉ. उदयभानु के साथ जेपी यूनिवर्सिटी के डॉ. हरीश चंगोत्रा और दो शोध छात्र विनीत मेहता और सीता सरन पटेल शामिल थे।

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याददाश्त पर पड़ता है असर

Depression patients may suffer from diabetes

डॉ. उदयभानु ने बताया कि डिप्रेशन और डायबिटीज की स्थिति में सबसे ज्यादा नुकसान दिमाग को होता है। दोनों बीमारियों के साथ होने से दिमाग पर जोर पड़ता है और याददाश्त भी कमजोर होने लगती है। ऐसे में दोनों बीमारियों के लक्षण दिखने की स्थिति में इसकी दवा लेना शुरू कर देना चाहिए।

ऐसे किया शोध
शोध टीम ने क्रोनिक अनप्रडिक्टेबल स्ट्रेस से ग्रस्त स्विस एल्बीनो चूहे को रोजाना 21 दिन तक पांच मिलीग्राम एंटीडायबिटीज रोजीग्लिटाजोन दवा दी। इस दौरान चूहे के दिमाग की याददाश्त वाले हिस्से की हर दिन की गतिविधियों को मॉनीटर किया।

अध्ययन के दौरान यह बात सामने आई कि स्ट्रेस की वजह से दिमाग में ग्लूकोज ट्रांसपोर्टर को डिस्टर्ब कर देता है। लेकिन दवा देने के चलते स्ट्रेस तो कम होता है, साथ ही डायबिटीज की आशंका भी कम होने लगती है।

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