फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   department installed the meter four years ago and did not release water, the High Court gave instructions to s

हिमाचल: विभाग ने चार साल पहले लगा दिया मीटर और नहीं छोड़ा पानी, हाईकोर्ट ने दिए आपूर्ति करने के आदेश

Tue, 29 Apr 2025 10:57 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 29 Apr 2025 10:57 AM IST
सार

न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने प्रतिवादी को याचिकाकर्ता को पानी की आपूर्ति करने के आदेश देते हुए याचिका का निपटारा किया है। 

विज्ञापन
department installed the meter four years ago and did not release water, the High Court gave instructions to s
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पानी का मीटर स्वीकृत किया, पर जल आपूर्ति नहीं की गई। इसे लेकर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने प्रतिवादी को याचिकाकर्ता को पानी की आपूर्ति करने के आदेश देते हुए याचिका का निपटारा किया है। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि याचिका दायर होने के बाद अब बीच-बीच में पानी मिल रहा है। याचिकाकर्ता की शिकायत थी कि वर्ष 2020 में आईपीएच विभाग की ओर से उसके परिसर में पानी का मीटर भी लगा दिया गया, लेकिन उस कनेक्शन से पानी नहीं मिला।

विज्ञापन


इसके बाद अदालत ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए थे। याचिकाकर्ता जिला शिमला की तहसील ठियोग के गांव घोग का निवासी है। जल शक्ति विभाग की ओर से इस घर में घरेलू जल कनेक्शन में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा था। इसी को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी।  बता दें कि इस क्षेत्र में पानी की समस्या से बहुत सारे लोग परेशान हैं। आए दिन धरने-प्रदर्शन किए जा रहे हैं। हाईकोर्ट के फैसले के आने के बाद लोगों आस जगी है कि उनके नलों में ही पानी आएगा। सरकार ने नल और मीटर तो लगा दिए, लेकि उन नलों में एक बूंद पानी की नहीं आती है। 

विज्ञापन

पशुओं के सप्लीमेंट पर सरकार व विभाग ने दायर किया जवाब
पशुओं को दी जाने वाली  न्यूट्रिक्स बेलिस बोलस सप्लीमेंट ड्रग्स काॅस्मेटिक अधिनियम के अंतर्गत आती है या नहीं, इस पर सरकार व पशुपालन विभाग की ओर से प्रदेश हाईकोर्ट में जवाब दायर किया गया है। सरकार की ओर से दायर जवाब में दो ड्रग इस्पेक्टरों ने कहा है कि  पशुओं को दी जाने वाली सप्लीमेंट ड्रग्स कंट्रोल और कॉस्मेटिक कानून के तहत नहीं आती है, जबकि पशुपालन विभाग की ओर से बताया गया है कि यह सप्लीमेंट ड्रग्स कंट्रोल और कॉस्मेटिक अधिनियम में आता है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने याचिकाकर्ता को प्रत्युत्तर दायर करने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह के बाद होगी। तब तक कोर्ट के अंतरिम आदेश जारी रहेंगे। अदालत ने पिछले आदेश में याचिकाकर्ता मैसर्स प्रोविमी एनिमल न्यूट्रिशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ जारी कारण बताओ नोटिस पर रोक लगा दी थी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह दवा एक सप्लीमेंट है न कि ड्रग है। इन दोनों की टेस्टिंग के उप मानक भिन्न-भिन्न हैं। इसी को अदालत में चुनौती दी गई है। कंपनी ने हिमाचल राज्य ऊन खरीद और विपणन संघ लिमिटेड से करार किया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed