डिलीवरी सेंटर जा रहे हैं तो पढ़ लें ये खबर
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प्रदेश भर में स्थापित डिलीवरी सेंटरों में गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित प्रसव रामभरोसे है। ग्रामीण महिलाओं की जान जोखिम में डालकर प्रसव करवाना पड़ रहा है। कारण यह है कि डिलीवरी सेंटरों में 24 घंटे लाइट की सुविधा नहीं है। इन सेंटरों में जेनरेटर न होने के कारण बत्ती गुल होने की सूरत में इमरजेंसी लाइट से प्रसव किए जाते हैं। इमरजेंसी लाइट के बीच में बंद होने पर महिलाओं की जान रामभरोसे रहती है।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो पीएचसी और सीएचसी स्तर पर स्थापित डिलीवरी सेंटरों में अभी तक जेनरेटर की सुविधा मुहैया नहीं करवाई गई है। स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण महिलाओं की सुविधा को नजदीकी अस्पतालों में डिलीवरी सेंटर खोले हैं। प्रदेश में लेवन टू और थ्री स्तर के सैंकड़ों डिलीवरी सेंटरों में जेनरेटर नहीं हैं।
हर जिले में लेवल वन स्तर पर स्थापित डिलीवरी सेंटरों में ही जनरेटर सुविधा है। जहां सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट हैं, यह सुविधा वहां पर अस्पतालों में दी गई है। इनमें हर जिले के जिला स्तरीय अस्पताल या फिर मेडिकल कॉलेज शामिल हैं।
दी जाएगी लाइट की सुविधा
लेवल टू और थ्री स्तर पर डिलीवरी सेंटर पीएचसी और सीएचसी लेवल पर बनाए हैं। लेवल टू में हर माह करीब 20 महिलाओं के सुरक्षित प्रसव करवाए जाते हैं, जबकि लेवल थ्री में 10 महिलाओं के सुरक्षित प्रसव करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रदेश भर में लेवल टू और थ्री डिलीवरी सेंटरों में हर माह हजारों महिलाओं के सुरक्षित प्रसव होते हैं।
इन सेंटरों में 24 घंटे जनरेटर सुविधा नहीं है। लाइट गुल होने पर इन सेंटरों में इमरजेंसी लाइट से काम चलाया जाता है। सबसे बड़ी परेशानी उस समय आती है, जब लाइट गुल हो जाती है और इमरजेंसी लाइट बीच में छोड़ जाती है। संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य विभाग डीएस गुरुंग ने बताया कि तमाम डिलीवरी सेंटरों में लाइट सुविधा दी जाएगी। इसके लिए एचएलएल कंपनी से करार हो गया है।