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हिमाचल में पांच हजार वर्ष पुराने वट वृक्ष के अस्तित्व पर खतरा

Thu, 28 Apr 2016 12:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शाहतलाई (बिलासपुर)
ब्यूरो/अमर उजाला, शाहतलाई (बिलासपुर) Updated Thu, 28 Apr 2016 12:11 AM IST
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danger on 5000 years old religious tree at bilaspur.
वट वृक्ष के पास खुदाई से करीब पांच सौ वर्ष से भी पुराने वट वृक्ष के अस्तित्व पर भी खतरा पैदा हो गया है। - फोटो : अमर उजाला

बाबा बालक नाथ की तपोभूमि शाहतलाई मंदिर में वट वृक्ष के आसपास मंदिर न्यास द्वारा करवाए जा रहे निर्माण से श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाई जा रही है। वट वृक्ष के पास खुदाई से करीब पांच सौ वर्ष से भी पुराने वट वृक्ष के अस्तित्व पर भी खतरा पैदा हो गया है। मंदिर न्यास द्वारा मंदिर परिसर में किए जा रहे निर्माण कार्य के लिए 8 से 10 फुट गहरे गड्ढे खोदे जा रहें हैं।

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इन गड्ढों में वट वृक्ष की जडे़ भी दिखाई दे रहीं है। खुदाई के दौरान निकल रही जड़ों को काटा जा रहा है, ताकि किसी को वट वृक्ष को होने वाले नुकसान का आभास ही न हो सके। केंद्र सरकार से सेवानिवृत्त हुए कृषि वैज्ञानिक डॉ. अशोक भारद्वाज ने इस कार्य पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि वट वृक्ष के पास खुदाई से करीब पांच सौ साल से भी पुराने वट वृक्ष को खतरा हो सकता है।
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असल में मंदिर न्यास के कर्ता-धर्ताओं को शायद इसका आभास ही नहीं होगा कि इस निर्माण कार्य से श्रद्धालुओं को लाभ कम और आस्था को ठेस अधिक पहुंचेगी। वट वृक्ष बाबा जी के भक्तों की आस्था का केंद्र है और इस जैसे धार्मिक एवं ऐतिहासिक वट वृक्ष को किसी भी कारण और निर्माण से नुकसान होता है, तो उसे तत्काल बंद कर दिया जाना चाहिए। ताकि पांच सौ साल पुराने वट वृक्ष को किसी भी प्रकार से हानि न पहुंच सके।
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उन्होंने कहा कि वट वृक्ष की एरियर रूट्स (पेड़ की टहनियों से आने वाली जड़ों) से अधिक ग्रोथ मिलती है। इसकी लंबाई-चौड़ाई भी काफी अधिक होती है,  जिस कारण वट वृक्ष दुनिया का सबसे बड़ा पेड़ माना जाता है। समुद्र मंथन में भी वट वृक्ष का जिक्र आता है। बाबा बालक नाथ जी ने शाहतलाई में इस वट वृक्ष के नीचे 12 वर्षों तक तपस्या की थी।

इससे यह वट वृक्ष भारत ही नहीं, अपितु दुनिया भर में जाना जाता है। इस वट वृक्ष से श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आस्था भी जुड़ी है। यदि मंदिर न्यास के उक्त निर्माण के कारण वट वृक्ष को नुकसान पहुंचता है, तो श्रद्धालुओं सहित स्थानीय लोगों की आस्था को ठेस पहुंचना लाजमी है। इसलिए न्यास को तत्काल इस कार्य को रोक देना चाहिए।


सीएम और प्रशासन से की कार्य रोकने की मांग
कृषि वैज्ञानिक डॉ. अशोक भारद्वाज ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, उपायुक्त मानसी सहाय ठाकुर, एसडीएम घुमारवीं आदित्य नेगी और मंदिरों से जुड़े विभाग भाषा एवं संस्कृति विभाग से मांग की है कि मंदिर न्यास को वट वृक्ष के आसपास किसी भी निर्माण कार्य को करने से रोक जाए। ताकि बाबा जी की 12 वर्षों की तपस्या की यादों को संजोए रखा जा सके।

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