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Chamba News: पौष्टिकता से परिपूर्ण कस्तूरी बासमती की पैदावार पर मंडराया खतरा
Tue, 07 Nov 2023 11:16 AM IST
Krishan Singh
शशि धीमान, संवाद न्यूज एजेंसी, सिहुंता (चंबा)
शशि धीमान, संवाद न्यूज एजेंसी, सिहुंता (चंबा)
Published by: Krishan Singh
Updated Tue, 07 Nov 2023 11:16 AM IST
सार
जंगली जानवरों के आतंक के चलते सिहुंता क्षेत्र के 75 प्रतिशत किसानों ने कस्तूरी बासमती की खेती करना छोड़ दिया है।
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बासमती चावल
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
पौष्टिकता से परिपूर्ण कस्तूरी बासमती की पैदावार पर खतरा मंडरा गया है। जंगली जानवरों के आतंक के चलते सिहुंता क्षेत्र के 75 प्रतिशत किसानों ने कस्तूरी बासमती की खेती करना छोड़ दिया है। अब यहां इक्का-दुक्का किसान ही कस्तूरी बासमती की बिजाई कर रहे हैं। कस्तूरी बासमती स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। इसमें पौष्टिक तत्वों की मात्रा काफी रहती है। शिमला समेत प्रदेश के कई जिलों में कस्तूरी बासमती की आपूर्ति यहां से की जाती रही है। अब किसानों का कस्तूरी बासमती से मोह भंग होने लग पड़ा है।
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किसान कुलभूषण उपमन्यु, विजय कुमार, पवन कुमार, रूलदू राम, संजय कुमार, महाल सिंह और मदन लाल का कहना है कि क्षेत्र में जंगली सूअर और बंदरों के आतंक के चलते पैदावार प्रभावित हो रही है। ऐसे में पैदावार काफी कम हो गई है। काफी किसानों ने खेती करना छाेड़ दिया है। जंगली जानवरों के आतंक से पहले यहां करीब चार सौ क्विंटल कस्तूरी बासमती की पैदावार होती थी। पिछले एक दो सालों से फसल की पैदावार कम हुई है।
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इस समय महज 50 क्विंटल तक पैदावार हुई है। इससे किसानों की आजीविका का साधन भी कम हुआ है। कृषि विभाग चंबा के उपनिदेशक डॉ. कुलदीप धीमान का कहना है कि किसान सोलर फेंसिंग से फसलों को बचा सकते हैं। सरकार ने फसलों को बचाने के लिए ही सोलर फेंसिंग योजना शुरू की है। इसके तहत व्यक्तिगत और सामूहिक तौर पर किसान खेतों में फेंसिंग करवा सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए किसान विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।
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