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नोटबंदी: किसानों की मुश्किलें बढ़ीं, इतने कम हो गए सब्जियों के रेट

Tue, 13 Dec 2016 09:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊना
ब्यूरो/अमर उजाला, ऊना Updated Tue, 13 Dec 2016 09:34 AM IST
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Currency ban Affecting Farmers Crop in Himachal.

नोटबंदी से किसानों पर बड़ी मुसीबत आ गई है। महीनों की कड़ी मेहनत के बाद फसल बेचने मंडी पहुंचे किसानों पर नोटबंदी की मार पड़ने लगी है। मजबूर किसान भविष्य में कम पैदावार करने की सोच रहे हैं।

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हिमाचल के ऊना में आलू की बंपर पैदावार पर इस बार नोटबंदी की मार पड़ रही है। नवंबर व दिसंबर माह में अच्छे दाम मिलने की चाहत के सपने संजोए किसानों के आलू मिट्टी के भाव बिक रहे हैं। सब्जी मंडियों में आढ़तियों ने भी पुराने करेंसी नोटों से तौबा कर दी है, जिसके कारण किसानों को सब्जियों के उचित दाम नहीं मिल रहे हैं।
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ऐसे में किसानों को खेतों में लगाई हुई फसलों का खर्चा पूरा करना भी मुश्किल हो गया है। सब्जी मंडियों में आलू के खरीदार न मिलने से आलू का मूल्य धड़ाम से नीचे गिर गया है। सब्जी मंडी में 1500 से 1600 रुपये प्रति क्विंटल बिकने वाला आलू 400 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया है जिससे किसानों को आर्थिक मंदी झेलनी पड़ रही है।

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इतने कम हो गए सब्जियों के रेट

Currency ban Affecting Farmers Crop in Himachal.

देश की विभिन्न मंडियों में आलू की सप्लाई होती है और सबसे पहले ऊना का आलू पहुंचता है।  जिला में लगभग 700 हेक्टेयर भूमि पर आलू की फसल की पैदावार की गई थी। नवंबर महीने से आलू निकालने का दौर भी शुरू हो गया था।

8 नवंबर को देश में नोटबंदी की घोषणा के बाद इसकी खरीद पर सीधा असर पड़ा है। नोटबंदी के बाद थोक बाजार लडख़ड़ाया तो आलू बाहर भेजने की गतिविधियां शून्य हो गईं। यही हाल बाकी फसलों का भी है।

किसानों का कहना है कि 30 से 50 रुपए प्रति किलो बिकने वाला टमाटर अब 10 से 15 रुपए प्रतिकिलो बेचना पड़ रहा है। इसी तरह मटर के दाम भी 100 से घटकर 20 से 30 रुपए प्रतिकिलो तक पहुंच गए हैं।

रेट कम मिलने से अब किसानों ने इसकी सप्लाई कम करना शुरू कर दिया है। दाम गिरने से किसानों में रोष व्याप्त है। आढ़तियों ने पुराने करेंसी के नोटों से तौबा कर ली है जिससे आम किसान उत्पादन कम करने को मजबूर हैं।

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