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Shimla News: तारों की छांव में मां ने की संतान की लंबी उम्र की कामना
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अहोई अष्टमी पर माताओं ने रखा निर्जला व्रत, तारों की पूजा के बाद किया व्रत का पारण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना को लेकर रविवार को राजधानी में अहोई अष्टमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में माताओं ने पूरे विधि-विधान से व्रत रखा।
दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को तारों के दर्शन कर माताओं ने पूजा-अर्चना की और संतान की लंबी उम्र की कामना के साथ व्रत का पारण किया। संजौली, छोटा शिमला, लक्कड़ बाजार, विकासनगर सहित अन्य आसपास के क्षेत्रों में सुबह से ही घरों में पर्व को लेकर विशेष तैयारियां देखने को मिलीं। माताओं ने स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया और अहोई माता की पूजा के लिए तैयारियां कीं। शाम होते ही घरों में पूजा की थाली सजाई गई। परंपरागत तरीके से अहोई माता की कथा सुनी गई और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की गई। शाम ढलने के साथ ही माताओं की निगाहें आसमान की ओर टिक गईं। शाम करीब 6:30 बजे तारों के निकलने का इंतजार करती महिलाओं ने शुभ मुहूर्त में अर्घ्य देकर पूजा संपन्न की। इसके बाद परिवार के सदस्यों के साथ व्रत का पारण किया। कई घरों में बच्चों ने भी इस पर्व को लेकर खासा उत्साह दिखाया। आधुनिकता के दौर में भी सदियों पुरानी इस परंपरा के प्रति माताओं की अटूट आस्था देखने को मिली।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना को लेकर रविवार को राजधानी में अहोई अष्टमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर शहर के विभिन्न क्षेत्रों में माताओं ने पूरे विधि-विधान से व्रत रखा।
दिनभर उपवास रखने के बाद शाम को तारों के दर्शन कर माताओं ने पूजा-अर्चना की और संतान की लंबी उम्र की कामना के साथ व्रत का पारण किया। संजौली, छोटा शिमला, लक्कड़ बाजार, विकासनगर सहित अन्य आसपास के क्षेत्रों में सुबह से ही घरों में पर्व को लेकर विशेष तैयारियां देखने को मिलीं। माताओं ने स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया और अहोई माता की पूजा के लिए तैयारियां कीं। शाम होते ही घरों में पूजा की थाली सजाई गई। परंपरागत तरीके से अहोई माता की कथा सुनी गई और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की गई। शाम ढलने के साथ ही माताओं की निगाहें आसमान की ओर टिक गईं। शाम करीब 6:30 बजे तारों के निकलने का इंतजार करती महिलाओं ने शुभ मुहूर्त में अर्घ्य देकर पूजा संपन्न की। इसके बाद परिवार के सदस्यों के साथ व्रत का पारण किया। कई घरों में बच्चों ने भी इस पर्व को लेकर खासा उत्साह दिखाया। आधुनिकता के दौर में भी सदियों पुरानी इस परंपरा के प्रति माताओं की अटूट आस्था देखने को मिली।
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