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हिमाचल में अनुसूचित जाति के 35 हजार विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति पर संकट, ये है बड़ी वजह
Thu, 12 Dec 2019 12:47 PM IST
Krishan Singh
अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला
अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Thu, 12 Dec 2019 12:47 PM IST
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हिमाचल प्रदेश के करीब 35 हजार अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति पर संकट खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार ने इनको छात्रवृत्ति देने के लिए फंड का तरीका बदल दिया है। सभी राज्यों को खुद बजट का इंतजाम करने के आदेश दिए हैं। मामला उलझने से अभी तक इन विद्यार्थियों को साल 2018-19 की छात्रवृत्ति जारी नहीं हो सकी है।
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अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को दी जाने वाली विभिन्न छात्रवृत्तियों का पूरा खर्च अभी तक भारत सरकार उठाती है। अब केंद्र सरकार ने फंडिंग के तरीके को बदल दिया है। बदली प्रक्रिया के तहत बीते पांच साल के दौरान जारी हुई सबसे अधिक राशि का भार अब राज्यों को स्वयं उठाना होगा। साल 2017-18 तक की राशि केंद्र सरकार जारी कर रही है, लेकिन 2018-19 के लिए केंद्र ने पैसा देना बंद कर दिया है।
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हिमाचल में अनुसूचित जाति विभाग के माध्यम से हर साल शिक्षा विभाग को छात्रवृत्ति का बजट जारी होता है। अब राज्यों को स्वयं इसका इंतजाम करने को कहा है। इस नई व्यवस्था से हिमाचल सरकार पर करीब 50 करोड़ का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ गया है। प्रदेश में हर साल करीब 35 हजार अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत पैसा दिया जाता है।
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नई व्यवस्था लागू होने से हिमाचल में साल 2018-19 की छात्रवृत्ति अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को अभी तक नहीं मिल पाई। हिमाचल सहित देश के कई अन्य राज्य इस बदली प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। राज्यों ने केंद्र सरकार से 90:10 के अनुपात में बजट देने की मांग की है। हिमाचल जैसे छोटे राज्य में हर साल 50 करोड़ की राशि का इंतजाम करना सरकार के लिए मुश्किल हो गया है।