विश्वास के संकट पर सदन में घिरी वीरभद्र सरकार, हंगामा
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कांग्रेस सरकार पर विश्वास के संकट (क्राइसेज ऑफ कान्फिडेंस) का आरोप लगाते हुए भाजपा वीरवार को सदन में इस विषय पर चर्चा को अड़ी रही। हालांकि, भाजपा की इस मांग को स्पीकर बृज बिहारी लाल बुटेल ने खारिज कर दिया। इस बीच सदन में खूब हंगामा रहा।
एक बार तो बैठक को थोडे़ समय के लिए स्थगित कर दिया गया। दूसरी बार बैठक शुरू हुई तो दोनों पक्षों में नोकझोंक के बीच भाजपा ने वाक आउट कर दिया। खास बात ये रही कि वीरवार को बैठक के शुरू होते ही हिमाचल प्रदेश विधानसभा में देहरा के भाजपा विधायक रविंद्र सिंह रवि ने सदन में अमर उजाला समाचार पत्र लहराया।
देहरा के भाजपा विधायक रविंद्र सिंह रवि 31 मार्च को पहले पृष्ठ पर छपी ’38 विधायकों का सोनिया को पत्र, हम वीरभद्र के साथ’ खबर दिखाते हुए कई बार अमर उजाला को सदन में लहराते रहे। सत्ता पक्ष और विपक्ष में इस बीच खूब तनातनी चली रही। प्रश्नकाल काफी समय बाधित रहा।
रविंद्र सिंह रवि ने वीरवार को बैठक के शुरू होते ही कहा कि ईडी ने जो तलवार लटकाई है, उससे भी ज्यादा अब सरकार के समक्ष विश्वास का संकट पैदा हो गया है। उन्होंने अमर उजाला को सदन में लहराते हुए कहा कि विधायकों के हस्ताक्षर लेकर सोनिया गांधी को लिखा गया है कि वीरभद्र के नेतृत्व की सरकार में सबको विश्वास है। पर ऐसा करने की क्या मजबूरी हो गई।
धूमल ने सरकार पर साधा निशाना, बिंदल ने कहा चर्चा होनी चाहिए
इस पर संसदीय कार्य मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि सरकार पूरे बहुमत में है। स्पीकर बृज बिहारी लाल बुटेल इस बीच कहते रहे कि ये प्रश्नकाल का समय है। प्रश्नकाल को चलने दिया जाए। इस बीच नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार धूमल ने कहा कि सोमवार से इस मुद्दे को विपक्ष लगातार उठाता आ रहा है। पहली बार सिटिंग सीएम की प्रापर्टी को ईडी की ओर से अटैच किया जा रहा है।
स्पीकर ये कहकर निर्णय देते हैं कि इस पर चर्चा नहीं हो सकती। ये सब मीडिया में आ रहा है। सत्तारूढ़ दल में क्त्रसइसेस ऑफ कान्फिडेंस पैदा हो गया है। ये सब क्यों हो रहा है। कल सीएलपी की भी बैठक बुलाई गई। ये जो अनिश्चितता का दौर चला है। अगर इस पर मीडिया चर्चा नहीं कर सकता तो सदन तो कर सकता है। कोई बात छिपी तो नहीं है।
इस पर संसदीय कार्य मंत्री मुकेश अग्निहोत्री बोले कि क्त्रसइसेस ऑफ कान्फिडेंस की कोई दिक्कत नहीं है। नाहन से भाजपा विधायक राजीव बिंदल ने कहा कि ये गंभीर स्थिति है। सरकार को विधायकों के हस्ताक्षर करके दिल्ली भेजने पडे़ हैं। ये मामला इतना गंभीर है तो इस पर सदन में चर्चा होनी चाहिए। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस पर चर्चा को मंजूर नहीं कर सकते।
भाजपा विधायक राजीव बिंदल ने कहा कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू को सबके हस्ताक्षर लेने पड़ रहे हैं। सदन के नेता के विश्वास खो चुके हैं। इस स्थिति में विधानसभा में चर्चा क्यों नहीं हो सकती। इसके बाद दोनों ओर से नोक-झोंक चलती रही। शोर-शराबे के बीच लगभग 11 बजकर 23 मिनट पर स्पीकर ने विधानसभा की कार्यवाही को पौने 12 बजे के लिए स्थगित कर दिया। बाद में भी भाजपा के सदस्य हंगामा करते रहे और प्रदेश विधानसभा से वाकआउट कर गए। सदन में केवल दो ही सवाल पूछे जा सके।
पीलिया से मौत के मामले में फिर गरमाया सदन
पीलिया से मौत के मामले में वीरवार को फिर से सदन गरमाया। प्रश्नकाल के खत्म होने के बाद झंडूता के भाजपा विधायक रिखीराम कौंडल ने मामला उठाया कि शिमला में एक पुलिसकर्मी की मौत हुई है। वह विधानसभा परिसर में ही तैनात रहा है। कहा कि सुरजीत सिंह नाम का ये पुलिसकर्मी आईआरबी में तैनात था। शिमला में दूषित पानी के कारण उसकी पीलिया से मौत हो गई। इस मामले पर संज्ञान लिया जाए।
इस पर स्पीकर बृज बिहारी लाल बुटेल ने रिखीराम कौंडल को कहा कि उन्होंने इस बारे में कोई नोटिस नहीं दिया। बिना नोटिस दिए इस मामले पर चर्चा नहीं हो सकती है। स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि सदन की कार्यवाही कायदे कानून से ही चलती है। ये सही बात नहीं है। बाकी सरकार इस मामले का पूरा पता कर इसकी जांच करेगी। इस पर कौंडल ने कहा कि ये मामला सुबह ही उनके ध्यान में आया है। इसलिए उन्होंने इसे उजागर किया है।
कौल सिंह ठाकुर बोले, हम सीएम वीरभद्र के साथ एकजुट
कौल सिंह ठाकुर ने सदन में कहा कि ये हाउस डिगनिटी के लिए जाना जाता है। क्त्रसइसेस ऑफ कान्फिडेंस के विपक्ष के आरोप गलत हैं। सरकार बजट को पारित करने जा रही है। इससे पहले ही सीएलपी की बैठक होती रही है। जब भाजपा सत्ता में थी तो रोज सुबह बैठकें करती थी।
कौल सिंह ठाकुर ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस के विधायक पूरी तरह से सोनिया गांधी के मार्गदर्शन में एक हैं और सीएम वीरभद्र सिंह के साथ एकजुट हैं। परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कहा - हमने लिखकर दिया है कि हम वीरभद्र सिंह के नेतृत्व और सोनिया गांधी के मार्गदर्शन में हम एकजुट हैं।
सदन में नहीं आए सीएम
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह भोजनावकाश से पहले बेशक प्रदेश विधानसभा परिसर स्थित अपने कार्यालय में ही बैठे थे, मगर वे सदन में नहीं आए। सूत्रों ने बताया कि वे बजट पारण की तैयारियों के बीच अधिकारियों से मंत्रणा करते रहे।