छात्रवृत्ति घोटाला : जांच की जद में आएंगे कई वरिष्ठ अधिकारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शिक्षा विभाग में पकड़े गए 150 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले की जांच की जद में कई वरिष्ठ अधिकारी आएंगे। बीते पांच सालों में जनजातीय क्षेत्रों में छात्रवृत्ति नहीं बंटने पर इन अफसरों पर शिकंजा कसने की तैयारी हो गई है।
पूर्व सरकार के कार्यकाल के दौरान छात्रवृत्ति आवंटन की सही से मानीटरिंग नहीं करने का इन अफसरों पर आरोप है। जयराम सरकार के दो मंत्रियों रामलाल मारकंडेय और राजीव सैजल द्वारा यह मामला उठाने के बाद शिक्षा विभाग बीते पांच साल के दौरान वितरित की गई छात्रवृत्ति राशि के रिकॉर्ड को खंगालने में जुटा हुआ है।
प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि पूर्व की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान अनुसूचित जाति और जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को दी जाने वाले छात्रवृत्ति राशि की किसी भी स्तर पर मानीटरिंग नहीं हुई है।
रिपोर्ट में वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए
शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट में वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कई सवाल उठाए गए हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, जनजातीय विभाग, शिक्षा विभाग, मुख्य सचिव कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात किसी भी अफसर ने इन छात्रवृत्ति योजनाओं के आवंटन को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई।
कभी भी यह देखने का प्रयास नहीं किया गया कि छात्रवृत्ति आवंटन हो रहा है नहीं। अब छात्रवृत्ति घोटाला सामने आने के बाद पूर्व सरकार में नियुक्त वरिष्ठ अफसर जांच की जद में आ गए हैं।
लाहौल के विद्यार्थियों की शिकायत पर हुआ खुलासा
प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र लाहौल स्पीति में बीते पांच साल के दौरान विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति राशि नहीं मिलने का मामला जून महीने में सामने आया था। शिक्षा विभाग के निरीक्षण दल ने एक स्कूली विद्यार्थी को छात्रवृत्ति नहीं मिलने की निदेशालय रिपोर्ट भेजी थी।
इसके बाद क्षेत्र के कई और विद्यार्थियों ने भी छात्रवृत्ति राशि नहीं मिलने की शिकायत की थी। कृषि मंत्री रामलाल मारकंडेय ने शिक्षा सचिव से इस मामले की शिकायत की थी। शिक्षा विभाग की जांच के दौरान पता चला कि प्रदेश में 150 करोड़ से अधिक राशि का छात्रवृत्ति आवंटन में घोटाला हुआ है।