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खुलासा! गिलट के नाम पर नीलाम कर रहे शक्तिपीठ का सोना-चांदी

Sat, 10 Oct 2015 12:00 AM IST
Updated Sat, 10 Oct 2015 12:00 AM IST
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Fraud in gold silver at naina devi temple bilaspur himachal.

उत्तर भारत के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां नयनादेवी में गिलट के नाम पर सोना-चांदी की नीलामी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। लाखों रुपये का सोना-चांदी मात्र 30 रुपये प्रति किलो के हिसाब से नीलाम किया जा रहा था। ऐन मौके पर मंदिर के एक न्यासी धर्मपाल गौतम की आशंका पर सभी की मौजूदगी में इसकी जांच करवाई गई।

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जांच में नीलामी के लिए रखे गिलट की बोरी से एक किलो सोना और 7 किलो चांदी मिली। मामला सामने आने के बाद अब मंदिर प्रशासन पर कई सवाल उठ गए हैं। इसमें मिलीभगत की बू आ रही है। हालांकि, मामला दो माह पुराना है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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बोरी में मिले सोने की कीमत लगभग 30 लाख

Fraud in gold silver at naina devi temple bilaspur himachal.

अगर यह बात सामने नहीं आती तो श्रद्धालुओं के चढ़ावे के रूप में आया सोना-चांदी गिलट के नाम पर 30 रुपये किलो में ही नीलाम कर दिया जाता। पिछले साल 86 रुपये प्रतिकिलो में बिकने वाली गिलट को इस बार 30 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा था।

हालांकि, आपत्ति पर बाद में मंदिर प्रशासन ने इसे 286 रुपये प्रति किलो बेचा। डेढ़-दो माह तक चली जांच के बाद गिलट की बोरी में मिले सोने की कीमत लगभग 30 लाख और चांदी की कीमत लगभग ढाई लाख रुपये आंकी गई है। सवाल यह है कि प्रशासन से इतनी बढ़ी चूक कैसे हो सकती है, जबकि गिनती और छंटाई सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होती है।

कैसे हुआ खुलासा

Fraud in gold silver at naina devi temple bilaspur himachal.

दो माह पूर्व मंदिर प्रशासन ने रूटीन की तरह गिलट की नीलामी रखी। मंदिर के एक न्यासी धर्मपाल गौतम को भी बुलाया गया। गौतम ने गिलट का रेट कम होने और इसकी जांच करवाने की बात उठाई। जैसे ही गिलट का बोरा खोला गया, इसमें कुछ छत्र ऐसे मिले जो चांदी और सोने के लग रहे थे।

इसके बाद जांच में बड़ी मात्रा में सोना और चांदी पाया गया। प्रदेश सरकार या मंदिर प्रशासन इस मामले की जांच करवाता है तो सीसीटीवी फुटेज अहम रोल अदा कर सकती है। फुटेज से यह साबित हो जाएगा कि गड़बड़ी छंटाई के दौरान हुई है या फिर मंदिर के खजाने में सेंध लगाई जा रही है।

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मिलीभगत में कौन शामिल

Fraud in gold silver at naina devi temple bilaspur himachal.

मिलीभगत में कौन शामिल है। बड़ा सवाल यह है कि गिलट के बोरे में सोना-चांदी आया कैसे। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और एसडीएम हरीश गज्जू ने कहा कि वर्ष 1992 के बाद गिलट की नीलामी नहीं हुई थी। मंदिर प्रशासन के पास सोना-चांदी की जांच करने वाला कोई एक्सपर्ट नहीं है।

मंदिर प्रशासन ने ही मामला पकड़ा है। एक्सपर्ट बुलाकर मंदिर के सोने-चांदी को गिलट के रूप में नीलाम होने से बचाया गया। इसमें कार्रवाई नहीं बनती है। मंदिर न्यास पूरी पारदर्शिता बरत रहा है। भविष्य में भी इसका पूरा ख्याल रखा जाएगा।

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