फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   for prosecution Approval against dhumal the file will be transfered to Raj Bhavan

धूमल पर अभियोजन मंजूरी को राजभवन जाएगी फाइल

Mon, 31 Mar 2014 10:51 PM IST
बयूरो/ अमर उजाला, शिमला
बयूरो/ अमर उजाला, शिमला Updated Mon, 31 Mar 2014 10:51 PM IST
विज्ञापन
for prosecution Approval against dhumal the file will be transfered to Raj Bhavan

हिमाचल सरकार और एचपीसीए के बीच चल रही जंग में अब राजभवन भी उलझने वाला है। इस केस में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल के खिलाफ अभियोजन मंजूरी राज्यपाल से ली जा रही है।

विज्ञापन


ये भी लगभग तय है कि सांसद अनुराग ठाकुर के खिलाफ अभियोजन मंजूरी लोकसभा स्पीकर से आएगी।

राज्य सरकार सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के जरिये ये मंजूरी लेने जा रही है। इससे पहले सागर कत्था केस में वीरभद्र सिंह के खिलाफ भी राजभवन से ही अभियोजन मंजूरी ली गई थी।
विज्ञापन


दूसरी ओर, इस केस में अफसरों के खिलाफ अभियोजन मंजूरी जल्द देने का दबाव कार्मिक विभाग पर है।

सरकार अपने स्तर पर दे सकती है मंजूरी

for prosecution Approval against dhumal the file will be transfered to Raj Bhavan

चार्जशीट में आईपीसी और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धाराएं लगाई गई हैं। सूत्र कहते हैं कि आईपीसी के तहत मंजूरी सरकार अपने स्तर पर दे सकती है, जबकि पीसी एक्ट के तहत अनुपूरक चालान बाद में भी दायर किया जा सकता है।

सचिवालय में ये भी चर्चा थी कि शिमला लौट रहे मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से जल्द फाइल साइन करवाई जा सकती है। गृह विभाग के सूत्रों का कहना है कि सीवीसी की ओर से 7 मार्च, 2012 को जारी दिशा-निर्देशों के तहत आरोपी अफसरों के कमेंट लेने की जरूरत नहीं है।

ड्राफ्ट चार्जशीट में अतिरिक्त मुख्य सचिव कृषि दीपक सानन, डीसी बिलासपुर अजय शर्मा के साथ एडीसी मंडी गोपाल चंद का नाम भी जोड़ा गया है। एचपीसीए सब लीज के समय गोपाल चंद राजस्व विभाग में अतिरिक्त सचिव थे।

आईएएस बनाम आईपीएस हुई जंग

for prosecution Approval against dhumal the file will be transfered to Raj Bhavan

एचपीसीए केस की जंग आईएएस बनाम आईपीएस बन गई है। आईएएस अफसरों ने सवाल उठाए हैं कि आखिर चार्जशीट पर इतनी जल्दबाजी क्यों है?

एक आरोप ये भी है कि विजिलेंस पुलिस अफसरों से जुड़े मामलों जैसे फोन टैपिंग केस, बूट घोटाले या मन्हास के अवैध भवन निर्माण केस में धीमा है तो प्रशासनिक अफसरों के खिलाफ हैरानी भरी तेजी दिखाई जा रही है।

इस मसले पर चर्चा को आईएएस एसोसिएशन की बैठक मंगलवार को बुलाई गई है। इसमें निर्णय होगा कि मुख्यमंत्री के सामने सारी बात रखी जाए कि नहीं?

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed