धूमल पर अभियोजन मंजूरी को राजभवन जाएगी फाइल
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हिमाचल सरकार और एचपीसीए के बीच चल रही जंग में अब राजभवन भी उलझने वाला है। इस केस में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल के खिलाफ अभियोजन मंजूरी राज्यपाल से ली जा रही है।
ये भी लगभग तय है कि सांसद अनुराग ठाकुर के खिलाफ अभियोजन मंजूरी लोकसभा स्पीकर से आएगी।
राज्य सरकार सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के जरिये ये मंजूरी लेने जा रही है। इससे पहले सागर कत्था केस में वीरभद्र सिंह के खिलाफ भी राजभवन से ही अभियोजन मंजूरी ली गई थी।
दूसरी ओर, इस केस में अफसरों के खिलाफ अभियोजन मंजूरी जल्द देने का दबाव कार्मिक विभाग पर है।
सरकार अपने स्तर पर दे सकती है मंजूरी
चार्जशीट में आईपीसी और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धाराएं लगाई गई हैं। सूत्र कहते हैं कि आईपीसी के तहत मंजूरी सरकार अपने स्तर पर दे सकती है, जबकि पीसी एक्ट के तहत अनुपूरक चालान बाद में भी दायर किया जा सकता है।
सचिवालय में ये भी चर्चा थी कि शिमला लौट रहे मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से जल्द फाइल साइन करवाई जा सकती है। गृह विभाग के सूत्रों का कहना है कि सीवीसी की ओर से 7 मार्च, 2012 को जारी दिशा-निर्देशों के तहत आरोपी अफसरों के कमेंट लेने की जरूरत नहीं है।
ड्राफ्ट चार्जशीट में अतिरिक्त मुख्य सचिव कृषि दीपक सानन, डीसी बिलासपुर अजय शर्मा के साथ एडीसी मंडी गोपाल चंद का नाम भी जोड़ा गया है। एचपीसीए सब लीज के समय गोपाल चंद राजस्व विभाग में अतिरिक्त सचिव थे।
आईएएस बनाम आईपीएस हुई जंग
एचपीसीए केस की जंग आईएएस बनाम आईपीएस बन गई है। आईएएस अफसरों ने सवाल उठाए हैं कि आखिर चार्जशीट पर इतनी जल्दबाजी क्यों है?
एक आरोप ये भी है कि विजिलेंस पुलिस अफसरों से जुड़े मामलों जैसे फोन टैपिंग केस, बूट घोटाले या मन्हास के अवैध भवन निर्माण केस में धीमा है तो प्रशासनिक अफसरों के खिलाफ हैरानी भरी तेजी दिखाई जा रही है।
इस मसले पर चर्चा को आईएएस एसोसिएशन की बैठक मंगलवार को बुलाई गई है। इसमें निर्णय होगा कि मुख्यमंत्री के सामने सारी बात रखी जाए कि नहीं?