किसानों को नहीं दिया मुआवजा, रेलवे की जमीन की नीलामी के आदेश
- रेलवे की जमीन की नीलामी के आदेश
- ऊना-अंब रेलवे लाईन पर उत्तरी रेलवे को झटका
- किसानों की भूमि लेने के बाद नहीं दिया मुआवजा
- करोड़ों की जमीन की खुली नीलामी को मांगा ब्यौरा
- रेलवे की ओर से अदालत में पेश न होने पर फैसला
- जिला एवं सत्र न्यायधीश सीएल कोछड़ ने दिए आदेश
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किसानों की बेशकीमती भूमि अधिग्रहीत करने के बाद मुआवजा न देने पर अदालत ने रेलवे के खिलाफ सख्त आदेश पारित किए हैं। जिला ऊना के ऐसे पांच मामलों में लगभग ढाई करोड़ की मुआवजा राशि न देने पर जिला एवं सत्र न्यायालय ने किसानों की अधिग्रहीत की गई जमीन का पूरा ब्यौरा तलब कर उसकी खुली नीलामी के आदेश दिए हैं।
यह जमीन ऊना से लेकर अंब-अंदौरा रेलवे स्टेशन के बीच पड़ती है। ऐसे में अगर अदालत कार्रवाई करती है तो उत्तरी रेलवे को एक और बड़ा झटका लग सकता है। इससे पूर्व भी ऊना की अदालत ने आदेश पारित कर जिला मुख्यालय स्थित रेलवे स्टेशन को सील कर दिया था, जिसे बाद में कुछ घंटों बाद रिलीज किया गया।
मंगलवार को जिला एवं सत्र न्यायधीश सीएल कोछड़ की अदालत में हुई मामलों की सुनवाई में रेलवे की ओर से कोई भी पेश नहीं हुआ। इस पर अदालत ने किसानों के अधिवक्ता को 28 मार्च 2016 तक अधिग्रहीत की गई जमीन के पूरे दस्तावेज अदालत में जमा करवाने के आदेश दिए ताकि इस भूमि की वर्तमान बाजार भाव पर खुली नीलामी की जा सके।
योगराज को दिया जाना है 79 लाख रुपए मुआवजा
अधिवक्ता अरुण कुमार सैणी ने बताया कि 30 मार्च 2012 को चुरडू निवासी योगराज की भूमि के बदले 79 लाख 40 हजार 752 रुपये मुआवजा तय हुआ था। इसी तरह चुरडू के रणजीत को 38 हजार 288, जबकि दियाड़ा के भगत राम को 30 जुलाई 2011 को 72 लाख 79 हजार 661 रुपये मुआवजा अदालत द्वारा तय किया गया।
वहीं, दियाड़ा के ही गुरनाम सिंह को 9 लाख 19 हजार 516 तथा रामकिशन को 95 लाख 37 हजार 739 रुपये 30 जुलाई 2011 को मुआवजे के तौर पर देना तय हुआ। सैणी ने बताया कि अदालत ने उक्त रकम रेलवे को 15 प्रतिशत ब्याज राशि के साथ देने के आदेश दिए थे।
लेकिन रेलवे की ओर से कोई भी पहल नहीं की गई। लिहाजा अदालत ने अब नीलामी के लिए रेलवे द्वारा अधिग्रहीत भूमि का ब्यौरा मांगा गया है। इसके लिए 28 मार्च 2016 की तिथि तय की गई है।