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Shimla News: इंश्योरेंस क्लेम न देने पर बीमा कंपनी को 5.21 लाख मुआवजा और 50 हजार जुर्माने के आदेश
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आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह ने सुनाया फैसला, 9 प्रतिशत ब्याज प्रति वर्ष की दर से 45 दिनों के भीतर भुगतान के भी दिए निर्देश
- साल 2020 को दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हुआ था वाहन, कंपनी ने मालिक के दावे को किया था खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला।
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह वाहन मालिक को इंश्योरेंस क्लेम न देने पर बीमा कंपनी पर जुर्माना लगाया है। आयोग ने एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को शिकायत दर्ज करने की तिथि से वसूली तक नौ प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज सहित 5,41,684 (आईडीवी वैल्यू) रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया है। बशर्ते कि शिकायतकर्ता कंपनी के पास रद्द आरसी जमा करे। साथ ही 45 दिनों के भीतर 50 हजार रुपये मानसिक तनाव और कोर्ट खर्च के भी देने होंगे। इंश्योरेंस कंपनी ने वाहन मालिक के दावे को खारिज किया था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान तहसील ननखड़ी निवासी शिकायतकर्ता रजत शिरकोट ने बताया कि उसका वाहन बीमाकृत था। 3 जुलाई 2020 को वह वाहन में रामपुर बुशहर आ रहा था। तभी रास्ते में वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। उन्होंने इस बाबत पुलिस और बीमा कंपनी को सूचित किया। इसी दौरान कंपनी के सर्वेक्षक ने मौके पर जाकर वाहन को पूरी तरह से क्षतिग्रस्त घोषित कर दिया था। दलील दी गई कि शिकायतकर्ता ने कंपनी के संज्ञान में सभी तथ्य लाए थे, लेकिन दावे का निपटारा नहीं किया। इससे परेशान होकर उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।
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- साल 2020 को दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हुआ था वाहन, कंपनी ने मालिक के दावे को किया था खारिज
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला।
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह वाहन मालिक को इंश्योरेंस क्लेम न देने पर बीमा कंपनी पर जुर्माना लगाया है। आयोग ने एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी को शिकायत दर्ज करने की तिथि से वसूली तक नौ प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज सहित 5,41,684 (आईडीवी वैल्यू) रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया है। बशर्ते कि शिकायतकर्ता कंपनी के पास रद्द आरसी जमा करे। साथ ही 45 दिनों के भीतर 50 हजार रुपये मानसिक तनाव और कोर्ट खर्च के भी देने होंगे। इंश्योरेंस कंपनी ने वाहन मालिक के दावे को खारिज किया था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान तहसील ननखड़ी निवासी शिकायतकर्ता रजत शिरकोट ने बताया कि उसका वाहन बीमाकृत था। 3 जुलाई 2020 को वह वाहन में रामपुर बुशहर आ रहा था। तभी रास्ते में वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। उन्होंने इस बाबत पुलिस और बीमा कंपनी को सूचित किया। इसी दौरान कंपनी के सर्वेक्षक ने मौके पर जाकर वाहन को पूरी तरह से क्षतिग्रस्त घोषित कर दिया था। दलील दी गई कि शिकायतकर्ता ने कंपनी के संज्ञान में सभी तथ्य लाए थे, लेकिन दावे का निपटारा नहीं किया। इससे परेशान होकर उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।