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Shimla News: ट्रक की टक्कर से सहायक अभियंता की मौत पर पत्नी, बेटियों को 1.10 करोड़ मुआवजा के आदेश
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न्यायाधीश अजय मेहता ने सुनाया फैसला, साल 2015 में एनएच-5 पर तारादेवी में हुई थी घटना
ऊर्जा विभाग में तैनात थे राजेश वर्मा, मुआवजे के लिए मृतक के आश्रितों ने लगाई थी न्यायालय में गुहार
प्रतिवादियों को 30 दिन के भीतर मुआवजा राशि देने के आदेश
दीपक मेहता
शिमला। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने सड़क दुर्घटना के सरकारी कर्मी की मौत पर आश्रितों पत्नी और दो बेटियों को 1.10 करोड़ रुपये बतौर मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश अजय मेहता (मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्युनल) ने यह फैसला सुनाया है। अदालत ने प्रतिवादी द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (बीमा कंपनी) को 30 दिन के भीतर याचिका दायर करने की तारीख से वसूली तक प्रति वर्ष 7.5 फीसदी के ब्याज के साथ दावेदारों को भुगतान करने का आदेश दिया है।
एमएसीटी ने दायर एक याचिका में फैसला सुनाते हुए मृतक राजेश वर्मा की दावेदार पत्नी भगती देवी और दो बेटियों को 1.10 करोड़ की राशि देने के आदेश दिए हैं। न्यायाधिकरण ने यह भी निर्देश दिए हैं कि मुआवजे की राशि जमा करने पर इसे याचिकाकर्ताओं के बीच 30:35:35 के अनुपात में विभाजित किया जाए। इसके साथ ही याचिकाकर्ता पत्नी के शेयर की मुआवजे की राशि को किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में दो वर्षों के लिए एफडीआर के रूप में और बेटियों के शेयरों को वयस्क होने तक उसी राष्ट्रीयकृत बैंक में एफडीआर के रूप में निवेश किया जाएगा।
दरअसल, 30 जनवरी, 2015 को शिमला-सोलन हाईवे पर तारादेवी के पास वाहन दुर्घटना में ठियोग निवासी राजेश वर्मा (42) की मौत हो गई थी। वह ऊर्जा विभाग में सहायक अभियंता के पद पर तैनात थे। हादसे के दिन राजेश वर्मा पत्नी और दो नाबालिग बेटियों के साथ वाहन में सोलन से शिमला आ रहे थे। इस बीच तारादेवी के एक निजी वर्कशाॅप का एक ट्रक अनियंत्रित होकर उनके वाहन से टकरा गया। इस हादसे में वाहन में सवार लोगों को कई चोटें आईं और उन्हें इलाज के लिए आईजीएमसी शिमला ले जाया गया। लेकिन, राजेश शर्मा की मौत हो गई। शिकायत पर पुलिस स्टेशन बालूगंज में आईपीसी की धारा 279, 337, 304-ए के तहत एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद मृतक की पत्नी ने एमएसीटी न्यायालय में उचित मुआवजे को लेकर याचिका दाखिल की थी। प्रतिवादियों को अदालत के समक्ष दावेदारों को मुआवजा राशि जमा करवाने का फैसला सुनाया है।
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ऊर्जा विभाग में तैनात थे राजेश वर्मा, मुआवजे के लिए मृतक के आश्रितों ने लगाई थी न्यायालय में गुहार
प्रतिवादियों को 30 दिन के भीतर मुआवजा राशि देने के आदेश
दीपक मेहता
शिमला। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) ने सड़क दुर्घटना के सरकारी कर्मी की मौत पर आश्रितों पत्नी और दो बेटियों को 1.10 करोड़ रुपये बतौर मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश अजय मेहता (मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्युनल) ने यह फैसला सुनाया है। अदालत ने प्रतिवादी द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (बीमा कंपनी) को 30 दिन के भीतर याचिका दायर करने की तारीख से वसूली तक प्रति वर्ष 7.5 फीसदी के ब्याज के साथ दावेदारों को भुगतान करने का आदेश दिया है।
एमएसीटी ने दायर एक याचिका में फैसला सुनाते हुए मृतक राजेश वर्मा की दावेदार पत्नी भगती देवी और दो बेटियों को 1.10 करोड़ की राशि देने के आदेश दिए हैं। न्यायाधिकरण ने यह भी निर्देश दिए हैं कि मुआवजे की राशि जमा करने पर इसे याचिकाकर्ताओं के बीच 30:35:35 के अनुपात में विभाजित किया जाए। इसके साथ ही याचिकाकर्ता पत्नी के शेयर की मुआवजे की राशि को किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में दो वर्षों के लिए एफडीआर के रूप में और बेटियों के शेयरों को वयस्क होने तक उसी राष्ट्रीयकृत बैंक में एफडीआर के रूप में निवेश किया जाएगा।
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दरअसल, 30 जनवरी, 2015 को शिमला-सोलन हाईवे पर तारादेवी के पास वाहन दुर्घटना में ठियोग निवासी राजेश वर्मा (42) की मौत हो गई थी। वह ऊर्जा विभाग में सहायक अभियंता के पद पर तैनात थे। हादसे के दिन राजेश वर्मा पत्नी और दो नाबालिग बेटियों के साथ वाहन में सोलन से शिमला आ रहे थे। इस बीच तारादेवी के एक निजी वर्कशाॅप का एक ट्रक अनियंत्रित होकर उनके वाहन से टकरा गया। इस हादसे में वाहन में सवार लोगों को कई चोटें आईं और उन्हें इलाज के लिए आईजीएमसी शिमला ले जाया गया। लेकिन, राजेश शर्मा की मौत हो गई। शिकायत पर पुलिस स्टेशन बालूगंज में आईपीसी की धारा 279, 337, 304-ए के तहत एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद मृतक की पत्नी ने एमएसीटी न्यायालय में उचित मुआवजे को लेकर याचिका दाखिल की थी। प्रतिवादियों को अदालत के समक्ष दावेदारों को मुआवजा राशि जमा करवाने का फैसला सुनाया है।
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