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Shimla News: शराब का अर्जित लाभ न देने पर डेढ़ साल की सजा बरकरार, आत्मसमर्पण का आदेश

Sun, 19 Jan 2025 11:55 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 19 Jan 2025 11:55 PM IST
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सत्र न्यायाधीश की अदालत ने सुनाया फैसला, दोषी की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को रखा बरकरारसाल 2008 से 2010 तक मिलकर काम कर रहे थे शराब कारोबारी, शराब का अर्जित लाभ न चुकाने के लगाए थे आरोप
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शराब का अर्जित लाभ की अदायगी न देने पर जिला अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने आरोपी गोविंद शर्मा को 10 मार्च 2025 तक ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने के भी आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता/आरोपी गोविंद शर्मा निवासी तहसील चौपाल ने अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी। सत्र न्यायाधीश दविंदर कुमार की अदालत ने अपील को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया है।
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शिकायतकर्ता कुलदीप चंद कंवर और आरोपी गोविंद शर्मा वर्ष 2008 से मैसर्स निक्का राम के नाम से हिमाचल प्रदेश में विभिन्न शराब की दुकानें चलाने के लिए संयुक्त व्यवसाय कर रहे थे। इस व्यवसाय के संबंध में शिकायतकर्ता कुलदीप चंद कंवर और निक्का राम आरोपी के भाई के बीच समझौता हुआ था। गोविंद व्यवसाय का प्रबंधन करता था और बैंक खातों को संचालित करने के लिए अधिकृत था। वह फर्म की ओर से शराब खरीदता था और उसका भुगतान करता था। शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि मार्च, 2010 में उक्त व्यवसाय में अपना हिस्सा वापस ले लिया था और खातों के निपटान के बाद पिछले दो वर्षों का लाभ 4.35 करोड़ रुपये था। अर्जित लाभ के बदले में आरोपी ने शिकायतकर्ता के पक्ष में अलग-अलग तिथियों के चार चेक जारी किए थे, जिनकी कुल राशि 32,90,585 रुपये यूको बैंक चौपाल में देय थी। इस दौरान तीन चेक बैंक की ओर से स्वीकार कर दिए गए, जबकि 26,40,585 की राशि का चौथा चेक बैंक ने भुगतान रोको के आधार पर अस्वीकार कर दिया गया। इसके बाद आरोपी गोविंद शर्मा को राशि के भुगतान करने के लिए कानूनी नोटिस भी जारी किया। 20 सितंबर, 2010 को निर्धारित समय में राशि न चुकाने पर कुलदीप ने एनआई एक्ट के तहत न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष केस दायर किया। अदालत में दोनों पक्षों को सुनने और सबूतों के अवलोकन पर 4 अप्रैल 2021 को गोविंद शर्मा को दोषी ठहराया था। इसके बाद 20 दिसंबर 2021 को उसे डेढ़ वर्ष कारावास और 44 लाख रुपये का मुआवजा देने की सजा सुनाई थी। उधर, सत्र न्यायाधीश ने गोविंद शर्मा को पारित सजा को भुगतने के लिए जमानत बांड के साथ आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए हैं।
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