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शव से अमानवीयता का मामला: मंडल आयुक्त ने सरकार को सौंपी जांच रिपोर्ट
Wed, 03 Jun 2020 05:00 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Wed, 03 Jun 2020 05:00 PM IST
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राजधानी शिमला में मौत के बाद मंडी निवासी कोरोना पॉजिटिव की अंत्येष्टि के दौरान शव से अमानवीय व्यवहार पर बैठाई सरकार की उच्च स्तरीय जांच पूरी हो गई है। मंडलायुक्त राजीव शर्मा ने जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। डीसी के अलावा एसडीएम शिमला शहरी, नगर आयुक्त और आईजीएमसी के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट के अलावा मृतक के परिजनों के बयान लिए गए हैं।
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पीड़ित परिवार के बयान लेने मंडलायुक्त खुद सरकाघाट स्थित मृतक के घर गए थे। सूत्रों का कहना है कि जांच अधिकारी के तौर पर राजीव शर्मा ने प्रोटोकाल की अवहेलना और गलती करने वाले अधिकारियों की गलती को इंगित किया है। मंडलायुक्त की रिपोर्ट आने के बाद अब दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की गेंद सरकार के पाले में आ गई है।
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सूत्रों का कहना है कि कोविड पॉजिटिव शव के दाह संस्कार को तय प्रोटोकाल के अनुसार हर स्तर के अधिकारी के लिए अलग-अलग एक्ट के तहत जिम्मेदारी निर्धारित है। मामले पर सीधे तौर पर हाईकोेर्ट की भी नजर है तो ऐसे में कहा जा रहा है कि सरकार कई अधिकारियों पर कार्रवाई कर सकती है। बता दें कि 5 मई को मंडी के सरकाघाट के 21 वर्षीय युवक की आईजीएमसी शिमला में मौत हो गई थी।
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शव की अंत्येष्टि कनलोग श्मशानघाट में हुई। जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम शिमला ने गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए बिना परिवार की मौजूदगी आधी रात को शव का संस्कार कर दिया। अमर उजाला ने मामले को प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद मामला कोर्ट पहुंचा।
याचिका में केरोसिन-डीजल से शव को जलाने के भी आरोप लगे। हाईकोर्ट ने एक अधिवक्ता की याचिका पर सरकार से मामले में जवाब तलब किया। इस पर सरकार ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए। चूंकि डीएम एक्ट, पैनडेमिक एक्ट व म्युनिसिपल एक्ट में सभी के अपने दायित्व हैं। ऐसे में कई अफसरों की गर्दन पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।