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बच गई प्रदेश सरकार, अवमानना याचिका खारिज

Mon, 28 Apr 2014 11:28 PM IST
बयूरो/ अमर उजाला, शिमला
बयूरो/ अमर उजाला, शिमला Updated Mon, 28 Apr 2014 11:28 PM IST
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contempt of court plea rejected in supreme court

हिमाचल में 85वें संविधान संशोधन को लागू न करने पर राज्य सरकार के खिलाफ दायर अवमानना याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज हो गई। सोमवार को जस्टिस सुरेंद्र सिंह निझर और जस्टिस सीकरी की खंडपीठ ने कहा कि चूंकि राज्य सरकार इस मामले में फैसला ले चुकी है, इसलिए इसमें अवमानना का मामला नहीं बनता।

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सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में सरकार को समयबद्ध फैसला लेने के ही आदेश पहले दिए थे। राज्य सरकार की कैबिनेट ने 30 अक्तूबर 2013 को फैसला लिया था कि हिमाचल में 85वें संविधान संशोधन को लागू नहीं किया जाएगा, क्योंकि यहां सरकारी सेवा में आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को पहले से ही पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्राप्त है।
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अलग से केस दायर कर सकते हैं

contempt of court plea rejected in supreme court

फैसले के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं जनजाति कर्मचारी महासंघ ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी। कोर्ट ने हालांकि यह भी कहा है कि यदि याचिकाकर्ता चाहें तो अलग से केस दायर कर सकते हैं।

कोर्ट के इस फैसले का सामान्य वर्ग कर्मचारी कल्याण महासंघ ने स्वागत किया है। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष भगतराम ठाकुर और महासचिव भूतेश्वर चौहान खुद दिल्ली गए थे।

सचिवालय इकाई के अध्यक्ष मस्तराम वर्गा और प्रदीप जसवाल ने भी इसके लिए सामान्य वर्ग कर्मचारियों को बधाई दी है।

क्या है 85वां संविधान संशोधन?

contempt of court plea rejected in supreme court

85वें संविधान संशोधन में एससी-एसटी कर्मियों को सरकारी सेवा में प्रमोशन के दौरान कांसिक्वेंशियल वरिष्ठता देने का प्रावधान है।


हिमाचल में पहले से ही एससी-एसटी को नियुक्ति-प्रमोशन में आरक्षण प्राप्त है।

लेकिन यदि 85वें संविधान संशोधन को लागू किया जाता तो 1996 से सभी विभागों में वरिष्ठता सूची बदली जानी थी।

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हक के लिए नए सिरे से केस करेंगे

contempt of court plea rejected in supreme court

एससी-एसटी कर्मचारी महासंघ की ओर से केस दायर करने वाले ज्ञानचंद भाटिया और थानेश्वर नेगी ने कहा कि संविधान संशोधन के तहत मिले अधिकार को लेने के लिए नए सिरे से एसएलपी दायर की जाएगी।

भेदभावपूर्ण रवैये वाली राज्य सरकार का भी हर स्तर पर विरोध करेंगे।

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