ब्लड सैंपल जाचं में खुलासा, पानी में सीवरेज से फैला पीलिया
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शहर में पीलिया के मामले एकाएक कैसे बढ़ गए, ब्लड सैंपल की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। पीलिया पीड़ित लोगों के ब्लड सैंपल की दिल्ली स्थित लैब में जांच के बाद हेपेटाइटिस ई वायरस की मौजूदगी का पता चला है। सीवरेज युक्त पानी का सेवन करने से हेपेटाइटिस ई वायरस पनपता है।
दिल्ली स्थित लैब की रिपोर्ट आने के बाद नगर निगम की टीम ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का दौरा किया। निरीक्षण के दौरान प्लांट में भारी अनियमितताएं पाई गई। पीने के पानी में सीवरेज का पीला पानी मिलता रहा बावजूद इसके प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
इस प्रकरण में अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। नगर निगम शिमला के डिप्टी मेयर टिकेंद्र सिंह पंवर ने बताया कि शहर में एकाएक पीलिया के मामले बढ़ने के बाद इसका कारण जानना जरूरी था।
पलायन की सोच रहे खौफजदा लोग
दिल्ली की लैब में ब्लड सैंपल की जांच के दौरान हेपेटाइटिस ई का खुलासा हुआ। मामले की तह तक पहुंचने के लिए हाउस में पार्षदों की कमेटी गठित कर निरीक्षण किया गया। कमेटी की रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से रोजाना करीब दो एमएलडी पानी बिना ट्रीट किए अश्वनी खड्ड में छोड़ा जा रहा था।
इतना ही नहीं सितंबर 2014 के ब्लीचिंग पाउडर का एसटीपी में इस्तेमाल किया जा रहा था। नगर निगम के डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर ने बताया कि पीने के पानी में सीवरेज मिलाना, नकली शराब पिलाकर लोगों को मारने जैसे है। इसलिए इस लापरवाही में शामिल सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
पीलिया के बढ़ते मामलों से खौफजदा शहर के लोग अब पलायन की सोच रहे हैं। नगर निगम के डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर का कहना है कि हम लोगों के घरों में गए हैं। कई परिवारों से बात की है। लोग घबराए हुए हैं। लोग पलायन की योजना बना रहे हैं। नए शहरीकरण की यह दिशा बिल्कुल भी सही नहीं है। इस मुद्दे को गंभीरता से लेना बेहद जरूरी है।
पीलिया से निपटने को केंद्र सरकार करेगी मदद: नड्डा
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि शिमला में पीलिया फैलने के कारणों का पता लगाया जाएगा। इसके लिए इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च सेंटर (आईसीएमआर) नई दिल्ली से टीम भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह ने उन्हें पीलिया फैलने की जानकारी दी है।
पता चला कि शिमला में पीलिया के ढाई सौ मामले सामने आए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जीपी नड्डा शिमला भाजपा कार्यालय में आयोजित नए अध्यक्ष की ताजपोशी के दौरान पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में बोल रहे थे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि शिमला में बीमारी से निपटने के लिए केंद्र सरकार पूरी मदद करेगी।
प्रदेश सरकार पीलिया पर अंकुश लगाने के लिए जो भी मदद मांगेगी, केंद्र आगे बढ़कर मद्द करेगा। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि शिमला में हर साल पीलिया के मामले सामने आते हैं। लेकिन अभी तक इस बीमारी पर काबू नहीं पाया गया है। टीम मुख्य पेयजल स्रोतों से लेकर शहर के विभिन्न क्षेत्रों से पानी के सैंपल जुटाएगी। क्षेत्र में कहां पानी की पाइप लाइन के साथ सीवरेज की लाइन मिली है। इसका पता लगाया जाएगा।
पीने के दूषित पानी के मामले में मुकदमा दर्ज
सीवरेज युक्त दूषित पानी की सप्लाई को लेकर नगर निगम के डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर की शिकायत पर पुलिस ने थाना ढली में मुकदमा दर्ज कर लिया है। एफआईआर में फिलहाल किसी को नामजद नहीं किया है। डिप्टी मेयर की ओर से इस पूरे मामले में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को जिम्मेदार ठहराया गया है। जांच के बाद इस मामले में पाए जाने वाले आरोपियों के नाम केस में जुड़ेंगे।
जांच के दायरे में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट संचालक के अलावा प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड और आईपीएच के इस मामले से जुड़े जिम्मेदार अफसर भी आ सकते हैं। इनसे पुलिस जल्द ही पूछताछ कर सकती है। बताया जा रहा है कि दूषित पानी की सप्लाई को लेकर कहीं न कहीं इन लोगों की भी जवाबदेही बनती है।
पानी की जांच के लिए गठित की थी कमेटी
पुलिस ने इस मामले में प्रिवेंशन ऑफ एंड कंट्रोल ऑफ पॉल्यूशन एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत किया है। 29 दिसंबर को आयोजित नगर निगम के हाउस में अश्वनी खड्ड के पानी की जांच के लिए कमेटी गठित की गई थी। नगर निगम के पार्षदों और अधिकारियों की इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की खराब स्थिति और सीवरेज का पानी अश्वनी खड्ड में मिलने की बात कही थी।
इसी रिपोर्ट को आधार बना कर डिप्टी मेयर टिकेंद्र पंवर ने थाने में शिकायत दी है। मंगलवार को यह शिकायत थाना छोटा शिमला में दी गई थी लेकिन यह एरिया थाना ढली के तहत आता है इसलिए एफआईआर ढली में दर्ज की गई। एसपी शिमला डी डब्ल्यू नेगी ने कहा कि शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर आगामी छानबीन अमल में लाई जा रही है।
हर तीन घंटे बाद खड्ड में बहा देते थे सीवरेज का पीला पानी
शहर के लोगों की सेहत से सरेआम खिलवाड़ होता रहा और जिम्मेदार महकमे लापरवाह बने रहे। राजधानी में पीलिया फैलने का मुख्य कारण बताए जा रहे मल्याणा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन पर चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में लगी मोटरों को रेस्ट देने के लिए हर तीन घंटे बाद करीब आधे घंटे के लिए बंद कर दिया जाता था। इस दौरान सीवरेज अश्वनी खड्ड में बहा दी जाती थी।
इतना ही नहीं संयंत्र में बिजली बैकअप की व्यवस्था न होने से लाइट जाने पर भी सीवरेज सीधे अश्वनी खड्ड में बहाई जा रही थी। प्लांट में गंदगी साफ करने के लिए स्थापित किया सीवरेज क्लीयरिफायर कई सालों से खराब पड़ा था। नया क्लीयरिफायर लगाने के लिए एस्टिमेट तो बनाया गया लेकिन इसे स्थापित करने की योजना सिरे नहीं चढ़ी।
11 सालों से प्लांट से नहीं उठाया गया स्लज
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से स्लज (सूखी हुई गंदगी) करीब 11 सालों से नहीं उठाई गई है। स्लज उठाने के लिए आईपीएच ने प्लांट से सड़क तक ट्राली लगाने की योजना बनाई थी। यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई। एप्रोच रोड बनाने की योजना भी मूर्त रूप नहीं ले पाई।
सीवरेट ट्रीटमेंट प्लांट के ठेकेदार ने बताया कि प्लांट सही तरीके से काम
कर रहा है। प्लांट में जो कमियां रही हैं वह आईपीएच विभाग के स्तर पर हल की
जानी थीं। नगर निगम की टीम ने निरीक्षण के दौरान प्लांट को संतोषजनक करार
दिया था। टेस्ट भी सही पाए गए थे।
नियमित रूप से काम कर रहा है प्लांट- प्लांट नियमित रूप से काम कर रहा है। मोटर खराब न हो इसलिए रेस्ट दिया जाता है। इस दौरान वैकल्पिक मोटर से काम चलाया जाता है। प्लांट का क्लीयरिफायर काफी समय से खराब है। इसलिए स्टैंड बाई से काम चलाया जा रहा है।
नए क्लीयरिफायर के लिए एस्टिमेट बनाया है। संयंत्र में जनरेटर लगाने के लिए भी एस्टिमेट तैयार किया है। स्लज उठाने के लिए ट्राली लगाना व्यावहारिक नहीं है इसलिए एप्रोच रोड बनाने की योजना है। -एचसी चौहान सहायक अभियंता, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट