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Shimla News: पुरानी कार बेचने के मामले में उपभोक्ता की शिकायत खारिज
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जिला उपभोक्ता आयोग ने सुनाया फैसला
2019 की जगह 2018 मॉडल की कार बेचने का लगाया था आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला उपभोक्ता आयोग ने मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उसके अधिकृत डीलर गोयल मोटर्स के खिलाफ दायर एक उपभोक्ता की शिकायत को खारिज कर दिया है। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता यह साबित करने में असफल रहा कि उसे 2019 मॉडल के बजाय 2018 मॉडल की कार दी गई। आयोग ने पाया कि खरीदार को पहले से 2018 मॉडल की जानकारी थी और उसे 55 हजार रुपये की छूट तथा बोनस भी मिला था। जिले के उपमंडल रामपुर बुशहर निवासी हुक्कम सिंह नेगी ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसने 12 मार्च 2019 को मारुति विटारा ब्रेजा एलडीआई कार खरीदी।
प्रचारित ऑफर के अनुसार उसे 40 हजार रुपये की छूट और 15 हजार रुपये का एक्सचेंज बोनस मिलना था। लेकिन बाद में पता चला कि उन्हें 2019 मॉडल के नाम पर 2018 मॉडल बेचा गया और एक्सचेंज बोनस भी नहीं दिया गया। इस पर उसने 2.31 लाख रुपये ब्याज सहित और 25 हजार रुपये मुकदमेबाजी खर्च की क्षतिपूर्ति की मांग की थी। निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने कहा कि उसका शिकायतकर्ता से कोई सीधा अनुबंध नहीं है, वाहन की बिक्री डीलर के माध्यम से होती है। डीलर गोयल मोटर्स ने तर्क दिया कि खरीदार को वाहन खरीदते समय स्पष्ट रूप से बताया था कि यह 2018 मॉडल है और इसी कारण उसे छूट और बोनस दिया है। आयोग अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह ने कहा कि शिकायतकर्ता ने खुद लिखित रूप से स्वीकार किया था कि वाहन मई 2018 का मॉडल है। इस आधार पर आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता अपने आरोपों को पुख्ता सबूतों से साबित नहीं कर सका।
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2019 की जगह 2018 मॉडल की कार बेचने का लगाया था आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला उपभोक्ता आयोग ने मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उसके अधिकृत डीलर गोयल मोटर्स के खिलाफ दायर एक उपभोक्ता की शिकायत को खारिज कर दिया है। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ता यह साबित करने में असफल रहा कि उसे 2019 मॉडल के बजाय 2018 मॉडल की कार दी गई। आयोग ने पाया कि खरीदार को पहले से 2018 मॉडल की जानकारी थी और उसे 55 हजार रुपये की छूट तथा बोनस भी मिला था। जिले के उपमंडल रामपुर बुशहर निवासी हुक्कम सिंह नेगी ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसने 12 मार्च 2019 को मारुति विटारा ब्रेजा एलडीआई कार खरीदी।
प्रचारित ऑफर के अनुसार उसे 40 हजार रुपये की छूट और 15 हजार रुपये का एक्सचेंज बोनस मिलना था। लेकिन बाद में पता चला कि उन्हें 2019 मॉडल के नाम पर 2018 मॉडल बेचा गया और एक्सचेंज बोनस भी नहीं दिया गया। इस पर उसने 2.31 लाख रुपये ब्याज सहित और 25 हजार रुपये मुकदमेबाजी खर्च की क्षतिपूर्ति की मांग की थी। निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने कहा कि उसका शिकायतकर्ता से कोई सीधा अनुबंध नहीं है, वाहन की बिक्री डीलर के माध्यम से होती है। डीलर गोयल मोटर्स ने तर्क दिया कि खरीदार को वाहन खरीदते समय स्पष्ट रूप से बताया था कि यह 2018 मॉडल है और इसी कारण उसे छूट और बोनस दिया है। आयोग अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह ने कहा कि शिकायतकर्ता ने खुद लिखित रूप से स्वीकार किया था कि वाहन मई 2018 का मॉडल है। इस आधार पर आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता अपने आरोपों को पुख्ता सबूतों से साबित नहीं कर सका।
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