'मेक इन इंडिया के लिए देश को खतरे में डाल रहे पीएम मोदी'
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भारत की मोदी सरकार आईबी और रॉ की राय को दरकिनार कर रही है। गुप्तचर एजेंसियों की सिक्योरिटी क्लीयरेंस लिए बगैर ही मोदी सरकार विदेशी पूंजी निवेश को बुलावा दे रही है।
यह बात चीन दौरे के दौरान सामने आई है। यह आरोप कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने शनिवार को राजीव भवन शिमला में पत्रकार वार्ता में लगाए।
चतुर्वेदी ने कहा कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय सुरक्षा की वेदी पर विदेशी निवेश लाने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार के दौरान दूसरे देशों से आने वाले विदेशी निवेश को राष्ट्रहित की दृष्टि से भारतीय खुफिया एजेंसियों यानी आईबी और रॉ की जांच से गुजरना अनिवार्य था।
मोदी सरकार इस अनिवार्य प्रक्रिया को खत्म कर रही है, जिससे किसी भी तरह से विदेशी निवेश लाया जा सके। क्या यह तुगलकी निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेशी सैरसपाटे को तर्कसंगत बनाने के लिए राष्ट्रहित के विरोध में किया जा रहा है।
मोदी सरकार पिछली कांग्रेस सरकार की ओर से 2014-15 में रक्षा के लिए आवंटित की गई राशि को भी खर्च करने में असफल रही है। मोदी सरकार 28,446 करोड़ रुपये का इस्तेमाल ही नहीं कर पाई।
चीन यात्रा के दौरान राष्ट्रहित के मुद्दों को उठाने में रहे नाकामयाब
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री हाल ही में अपनी चीन यात्रा के दौरान अनेक राष्ट्रहित के मुद्दों को प्रभावशाली तरीके से उठाने में नाकामयाब रहे हैं।
इसमें अरुणाचल प्रदेश के नागरिकों को चीन की ओर से स्टेपल वीजा दिया जाना, ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन के क्षेत्र में अनधिकृत बांधों का निर्माण, पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 42 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश और भारत चीन के बीच 40 बिलियन अमेरिकी डॉलर के व्यापार असंतुलन के मुद्दे शामिल हैं।
‘एक रैंक, एक पेंशन’ पूर्व सैनिकों के लिए एक छलावा है। मोदी सरकार ने माना है कि जून 2014 से फरवरी 2015 के बीच पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा पर 746 बार युद्ध विराम का उल्लंघन किया गया।
ठीक एक साल पहले जब एक वर्ष में नियंत्रण रेखा पर 96 बार युद्ध विराम का उल्लंघन किया गया था, तो लोकसभा के चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी ने तल्खी भरे लहजे में कहा था कि ‘देश नहीं झुकने दूंगा और 56 इंच का सीना चाहिए’।
आज सच्चाई सबके सामने है। लेकिन नरेंद्र मोदी मौन मुद्रा में हैं। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता नरेश चौहान और कांग्रेस महासचिव हरभजन सिंह भज्जी विशेष रूप से मौजूद रहे।