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शहरी विकास मंत्री के विवादित बयान के बाद उठा सियासी भूचाल
Fri, 12 Mar 2021 07:38 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Fri, 12 Mar 2021 07:38 PM IST
सार
- विक्रमादित्य ने ली चुटकी- उत्तराखंड की तरह हो सकता है हिमाचल में धमाका
- आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने ट्वीट कर बयान को बताया महापाप
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कांग्रेस विधायक विक्रमादित्य सिंह
विस्तार
महाशिवरात्रि पर राम मंदिर में शिमला शहर के विधायक और शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शिव का अवतार पुरुष बताए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। सियासी गलियारों से लेकर सोशल मीडिया में भी भारद्वाज के बयान पर पक्ष-विपक्ष में बयानबाजी शुरू हो गई है।
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आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने ट्वीट किया कि मोदी की तुलना महादेव से करना महापाप है। कांग्रेस विधायक विक्रमादित्य सिंह ने भी मंत्री के बयान को अंध भक्ति बताया है। विक्रमादित्य ने फेसबुक पोस्ट कर चुटकी ली है कि जिस तरह का धमाका उत्तराखंड में हुआ है, वैसा हिमाचल में भी हो सकता है। कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर 25 साल सत्ता में रहने का सपना छोड़ दें।
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मंत्री भारद्वाज ने प्रधानमंत्री मोदी को शिव का अवतार पुरुष बताया
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उधर, शुक्रवार को भी सुरेश भारद्वाज अपने बयान पर कायम रहे। संजय सिंह के बयान पर उन्होंने कहा कि आप और पाप में काई अंतर नहीं है। इसलिए संजय सिंह क्या बोलते हैं, यह महत्व नहीं रखता। कहा कि सभी को बयान पूरा पढ़ना चाहिए। विक्रमादित्य के बयान पर उन्होंने कहा कि युवा नेता को सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी ही दिखी, क्योंकि उनका लक्ष्य किसी भी तरह सिर्फ सीएम की कुर्सी पाने पर है।
चुटकी ली कि कम से कम विपक्ष ने यह तो माना कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में पूरी पार्टी और सरकार चुनाव लड़ेगी। उनके दल में तो कुर्सी के लिए एक-दूसरे को कमतर दिखाने की होड़ चल रही है। स्पष्ट किया कि शिव के अवतार ने ही संकट के समय धरती पर आकर मानवता के कल्याण के लिए विष पिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिन्होंने 2019 के चुनाव में परिणाम आने से पहले केदारनाथ में गुफा में तपस्या की थी।
उन्होेंने कई ऐसे कदम उठाए जो अन्य दलों की सरकार होती तो वह उठाने से कतराती, लेकिन उन्होंने विपक्ष के आरोपों और सवालों के बावजूद मानवता के हित के लिए हर कदम उठाया। लॉकडाउन के दौरान लोगों को भूखा नहीं रहने दिया। यही वजह है कि सारी दुनिया में तुलनात्मक दृष्टि से भारत में मृत्युदर कम और रिकवरी ज्यादा है। दुनिया के लिए भी इसी मानवतावादी नीति का पालन करते हुए भारत की वैक्सीन विभिन्न देशों को दी जा रही है।