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चाहता तो बंद रख सकता था मुंह पर विधायक होने के नाते बोलना जरूरी : सुक्खू
Sun, 01 Sep 2019 06:12 PM IST
अरविन्द ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sun, 01 Sep 2019 06:12 PM IST
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कांग्रेस विधायक एवं पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सूक्खू (फाइल फोटो)
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विधानसभा में विधायकों की समस्या उठाने पर कांग्रेस विधायक एवं पूर्व प्रदेशाध्यक्ष ठाकुर सुखविंद्र सिंह सूक्खू ने रविवार को बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा है कि भाजपा सरकार द्वारा लाए गए यात्रा भत्ता बढ़ाने संबंधी विधेयक पर चाहते तो वह भी अपना मुंह बंद रख सकते थे, लेकिन विधायकों की वर्तमान व वास्तविक स्थिति पर बोलना जरूरी था।
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एक विधायक को वेतन तो मात्र 55 हजार रुपये मिलता है, बाकी तो भत्ते मिलते हैं जो जनता का काम करने के लिए ही खर्च किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि वह एक बार फिर दोहराते हैं, विधायकों को अपनी संपत्ति व आय के स्रोत हर साल सार्वजनिक करने चाहिए। उनका जनता के प्रति जवाबदेह होना जरूरी है। विधायक नैतिकता का भी पालन करें। अगर उनका जीवन पारदर्शी होगा तो कोई उन पर उंगली नहीं उठा सकता।
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सुक्खू ने कहा कि विधायक का कार्यालय खर्च ही रोजाना का दो से ढाई हजार रुपये आ जाता है। सरकार विधायकों को गाड़ी दे, ड्राइवर, पेट्रोल, ऑफिस व विधानसभा दौरे पर आने वाले सभी खर्च उठा ले तो विधायकों को कोई भत्ते देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वैसे भी अधिकतर विधायक यात्रा भत्ता क्लेम नहीं करते हैं।
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सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में पूर्व वरिष्ठ मंत्री विद्या स्टोक्स ही एकमात्र नेता रहीं, जो केवल एक रुपये वेतन लेती रहीं, वर्तमान में 68 विधायकों में ऐसा कोई नहीं, जो वेतन छोड़ रहा हो। इन सब बातों के मद्देनजर ही वह संकल्प लाए थे कि विधायकों को हर साल अपनी संपत्ति व देनदारियां सार्वजनिक करने के साथ ही आय के स्रोत भी बताने चाहिए जिससे विधायकों की वास्तविक स्थिति जनता के सामने आ जाएगी।