शीत सत्र: सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही हंगामा, विपक्ष ने इस मुद्दे पर किया वॉकआउट
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा शीत सत्र का पहला ही दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया। ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट आयोजन को लेकर चर्चा न कराए जाने से नाराज विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। दोनों पक्षों में नोकझोंक और नारेबाजी होती रही। इसी शोर-शराबे के बीच विपक्षी कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
सोमवार को दोपहर 2:00 बजे सत्र शुरू हुआ। करीब एक घंटा शोकोद्गार प्रस्ताव के शुरुआती वक्तव्यों के बाद जैसे ही मुख्यमंत्री साप्ताहिक कार्यसूची की जानकारी देने जा रहे थे तो इसी बीच नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने इन्वेस्टर मीट में सरकार पर बड़े घोटाले का आरोप लगाते हुए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा मांगी। स्पीकर डॉ. राजीव बिंदल ने इससे इंकार किया तो दोनों ओर से नोकझोंक शुरू हो गई।
विपक्षी विधायक खड़े हो गए और हंगामा करते रहे। दूसरी ओर सत्ता पक्ष के विधायक भी खड़े हो गए। दोनों ओर से नारेबाजी शुरू हो गई। कुछ ही मिनटों बाद स्पीकर ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को अगली कार्यवाही की अनुमति दी तो विपक्ष ने इसका विरोध शुरू कर दिया। इसी बीच कांग्रेस के विधायक सदन से वॉकआउट कर गए।
इन्वेस्टर मीट आयोजन में बड़ा घोटाला : अग्निहोत्री
वॉकआउट के बाद विधानसभा परिसर में नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि धर्मशाला में इन्वेस्टर मीट आयोजन में बड़ा घोटाला हुआ है। विपक्ष सारा काम रोककर चर्चा मांग रहा था। बड़े अधिकारी हिमाचल को बेचना चाहते हैं। इस मीट में अरबों रुपये लगा दिए गए हैं। 16 करोड़ रुपये का टेंट ही लगाया गया, जो दूसरे दिन उखड़ गया। हिमाचल को लाले की दुकान बना दिया गया है।
खर्च में बरती पारदर्शिता, सरकार चर्चा को तैयार : जयराम
विपक्ष के वॉकआउट के बाद सदन में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि सोमवार को सत्र का पहला दिन है। बहुत से महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने थी, मगर ऐसा नहीं हो पाया। इन्वेस्टर मीट में किए खर्च पर पूरी तरह पारदर्शिता बरती गई है। सरकार इस पर चर्चा के लिए तैयार है। विपक्ष का इस तरह से विरोध करना हिमाचल के विकास का सरकार का रास्ता रोकने की साजिश है।
उपलब्ध समय के अनुसार होगी चर्चा : बिंदल
विपक्ष के वॉकआउट के बाद स्पीकर डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि 12:28 बजे मुकेश अग्निहोत्री, मोहन लाल ब्राक्टा आदि सदस्यों की ओर से उन्हें स्थगन प्रस्ताव मिला। इस विषय पर पहले ही कई विधायकों ने प्रश्नों के उत्तर भी मांगे हैं। कई विधायकों ने चर्चा भी मांगी है। उपलब्ध समय के अनुसार इस विषय पर चर्चा होगी। वह इस प्रस्ताव को अस्वीकृत करते हैं।
वॉकआउट के बाद सदन के बाहर भी विपक्ष की नारेबाजी
विपक्ष ने जयराम सरकार से ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट पर श्वेतपत्र जारी करने की मांग की है। वाकआउट के बाद विपक्ष ने सदन के बाहर भी नारेबाजी की। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने मीडिया से बातचीत में जयराम सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि इन्वेस्टर्स मीट में 1838 कमरे किसके लिए बुक करवाए थे, इनमें कौन ठहरा था? इसको लेकर सरकार से श्वेतपत्र मांगा है।
इन्वेस्टर्स मीट में 16 करोड़ टेंट और छह करोड़ प्रचार-प्रसार पर खर्चे गए। कर्ज में डूबी सरकार पर इन्वेस्टर्स मीट एक और बोझ बढ़ाने के सिवाय कुछ नहीं था। कहा कि सरकार प्रदेश के विकास नहीं, इवेंट मैनेजमेंट कंपनी के रूप में काम कर रही है। इसका लाभ चंद चहेतों और पूंजीपतियों को दिया जा रहा है। यह पहली सरकार है, जिसके कैबिनेट बैठक के एजेंडे तक बिना अधिकारी की सूचना से बदले जा रहे हैं।
इन्वेस्टर्स मीट में आए निवेशकों की वित्तीय स्थिति जाने बगैर एमओयू के सहारे कोई निवेश नहीं करेगा। इसके लिए सरकार ने कोई होमवर्क नहीं किया है। मीट भाजपा की रैली बनाकर रह गई। कांग्रेस प्रदेश के संसाधनों को बेचने नहीं देगी। कहा कि डॉ. परमार के सपने के हिमाचल को ऐसे किसी को नहीं देने दिया जाएगा। इन्वेस्टर्स मीट में हिमाचल निर्माण डॉ. यशवंत सिंह परमार का चित्र तक लगाना सरकार ने उचित नहीं समझा।
इन मुद्दों पर सरकार से मांगा जवाब
69 नेशनल हाईवे, मंडी-पठानकोट फोरलेन परियोजना, मनाली-कीरतपुर फोरलेन परियोजना, रेललाइन, धारा-188, निवेशक को काम शुरू करने के तीन साल बाद एनओसी देने, मंडी हवाई अड्डा, स्कूल वर्दी, कानून व्यवस्था के खस्ताहाल और महंगाई पर सरकार से जवाब मांगा।
नेता प्रतिपक्ष के इशारे से पहले सदन से बाहर निकले विक्रमादित्य
इन्वेस्टर्स मीट पर नेता प्रतिपक्ष सदन में चर्चा करने पर अड़े थे। चर्चा करने की अनुमति न मिलने के बाद विपक्ष ने सदन में खड़े होकर नारेबाजी शुरू कर दी। नेता प्रतिपक्ष के वाकआउट के इशारा करने से पहले की शिमला ग्रामीण के विधायक विक्रमादित्य सिंह सदन से बाहर निकल गए थे।
उसके बाद बाहर अखबार पढ़ने बैठ गए। लगभग पांच मिनट बाद सदन के बाहर नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस विधायकों के साथ खड़ा होने की बजाय अकेले ही दिखे। वहीं, ठियोग के विधायक राकेश सिंघा ने विपक्ष के साथ वाकआउट नहीं किया। वह सदन की पूरी कार्रवाई में मौजूद रहे।