सीएम वीरभद्र को राहत, कुर्सी हिलाने के हक में नहीं हाईकमान
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हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर भले ही सीबीआई का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है, लेकिन कांग्रेस हाईकमान सीबीआई के छापों और जांच प्रक्रिया के आधार पर फिलहाल उनको कुर्सी से हटाने के पक्ष में नहीं है। कांग्रेस के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई ठोस सबूत सामने आने या फिर चार्जशीट और गिरफ्तारी की नौबत आने से पहले पार्टी उनकी कुर्सी हिलाने पर विचार नहीं कर रही है।
लिहाजा, पार्टी ने अभी बचाव जारी रखने का फैसला किया है। वीरभद्र के खिलाफ सीबीआई जांच की तेज रफ्तार को देखते हुए पार्टी के शीर्ष स्तर पर चर्चा हो रही है। छापेमारी के दिन ही हाईकमान ने बातचीत के बाद फैसला लिया गया कि मुख्यमंत्री का तुरंत बचाव किया जाए और इस पूरे मामले को राजनीतिक साजिश के तौर पर पेश कर मोदी सरकार पर हमला बोला जाए। इसके लिए कांग्रेस के शीर्ष नेता और राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद को उतारा गया।
नेतृत्व परिवर्तन के फैसले से डगमगा सकती है स्थिति
कांग्रेस के एक वरिष्ठ महासचिव ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन का फैसला पार्टी के लिए आत्मघाती हो सकता है। इसलिए पार्टी मोदी सरकार और भाजपा को कोई मौका देना नहीं चाहती। वरिष्ठ महासचिव ने कहा कि मोदी सरकार के केंद्रीय मंत्री और दो मुख्यमंत्रियों पर भ्रष्टाचार के सीधे आरोप लगे। मगर भाजपा ने एक के खिलाफ भी कार्रवाई नहीं की। बल्कि कांग्रेस के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाकर उसका डटकर मुकाबला किया।
यूपीए सरकार के दस साल के कार्यकाल में कांग्रेस हाईकमान ने भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर कई केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को उनकी कुर्सी से हटा दिया। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व स्तर पर चर्चा है कि विपक्ष में आने के बाद पार्टी हाईकमान खुद इन निर्णयों को गलत मानता है और अब फिर इस गलती को दोहराने के हक में नहीं है।