इस वजह से लोकसभा चुनाव में नए वोटरों तक कांग्रेस नहीं पहुंच पाई
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कांग्रेस प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल के समक्ष विभिन्न जिलों के पदाधिकारियों ने कुछ ऐसे तथ्य सामने रखे हैं, जिन पर कांग्रेस हाईकमान को देर सवेर विचार मंथन करना पड़ेगा।
पार्टी सूत्रों से मालूम हुआ है कि शिमला, बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा, सिरमौर, कांगड़ा, कुल्लू, सोलन, हमीरपुर आदि जिलों के नेताओं ने अलग-अलग मुलाकात की।
प्रभारी से साफ कह दिया है कि भाजपा से पिछड़ने का सबसे बड़ा कारण यही था कि पन्ना प्रमुखों का तोड़ कांग्रेस ने समय पर तलाश लिया होता तो निचले स्तर पर वोटरों से संपर्क कायम किया जा सकता था।
वोटरों तक पहुंचने में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की कमजोरी रही है। लोकसभा चुनाव में नए वोटरों तक कांग्रेस सही मायने में नहीं पहुंच पाई। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में और अनुशासन पैदा करने की दरकार है ताकि कांग्रेस को मजबूती प्रदान की जा सके।
कांग्रेस को मजबूत बनाकर ही आगामी वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में विरोधी दल भाजपा को टक्कर दी जा सकती है। प्रभारी रजनी पाटिल ने राजीव भवन में पार्टी के जिला पदाधिकारियों, पूर्व विधायकों और पूर्व जिलाध्यक्षों की नब्ज टटोलने को आमंत्रित किया था ताकि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के असली कारणों तक पहुंचा जा सके।
शिमला शहरी के पूर्व विधायक, पूर्व जिलाध्यक्ष और महिला कांग्रेस के पदाधिकारियों ने प्रभारी से कहा कि शिमला शहरी का लोकसभा चुनाव में अन्य विधानसभा क्षेत्रों से बेहतर प्रदर्शन रहा है। लोकसभा चुनाव से पहले बागियों की घर वापसी के कारण भी लोगों में अच्छा संदेश नहीं गया। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में शिमला में 9500 की लीड थी जबकि इस बार लीड 10630 थी। हार का अंतर पिछली बार से 1130 है जबकि अन्य विधानसभा क्षेत्रों में लीड काफी ज्यादा है।