{"_id":"67dc056158dcb93f2a0ccd18","slug":"concrete-stabilization-of-shoghi-kandaghat-section-of-four-lane-started-shimla-news-c-19-sml1001-504231-2025-03-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shimla News: फोरलेन के शोघी-कंडाघाट हिस्से की कंक्रीट स्टेबलाइजेशन शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shimla News: फोरलेन के शोघी-कंडाघाट हिस्से की कंक्रीट स्टेबलाइजेशन शुरू
विज्ञापन
खास खबर
बरसात के मौसम में भूस्खलन को रोकने में होगी मददगार, ड्रेनेज सिस्टम भी किया जाएगा दुरुस्त
11 किमी हिस्से में रहता हैै भूस्खलन का अधिक खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने शिमला-कालका फोरलेन के शोघी-कंडाघाट हिस्से पर कंक्रीट स्टेबलाइजेशन कार्य शुरू कर दिया है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बरसात के मौसम में भूस्खलन को रोकना और सड़क को सुरक्षित बनाना है।
दो सालों से फोरलेन पर एक तरफ लगातार भूस्खलन की समस्या बनी हुई है जिस कारण बरसात के मौसम में ट्रैफिक केवल एक ही ओर से चलाया जा रहा था। इससे वाहन चालकों को घंटों जाम में फंसना पड़ता था और यात्रियों के साथ स्थानीय निवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कंक्रीट स्टेबलाइजेशन कार्य के तहत पहाड़ी ढलानों को मजबूती दी जाएगी, डंगे का निर्माण किया जाएगा, ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त किया जाएगा। इसमें अत्याधुनिक भूस्खलन रोधी तकनीकों का इस्तेमाल होगा। एनएचएआई ने साल के अंत तक इस कार्य को पूरा करने का लक्ष्य रखा है। एनएचएआई के साइट इंजीनियर योगेश ने बताया कि इस समय फोरलेन के शिमला से कंडाघाट तक के करीब 29 किलोमीटर हिस्से में निर्माण कार्य चल रहा है। इसका करीब 11 किलोमीटर पहाड़ी क्षेत्र सबसे अधिक संवेदनशील है। इस हिस्से में भूस्खलन का खतरा रहता है।
यदि समय पर यह कार्य पूरा हो जाता है तो फोरलेन न केवल सुरक्षित बनेगा, बल्कि पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। लगातार बढ़ते ट्रैफिक और दो वर्षों से भूस्खलन के चलते होने वाली परेशानियों को देखते हुए यह कार्य जरूरी है। एनएचएआई ने लोगों से अपील की है कि वह निर्माण कार्य के दौरान संयम बनाए रखें और यातायात नियमों का पालन करें। अधिकारियों ने भरोसा जताया कि इस परियोजना के पूरा होते ही शिमला-कालका फोरलेन देश के सबसे सुरक्षित और आधुनिक पहाड़ी मार्गों में शामिल होगा।
विज्ञापन
यह होती है कंक्रीट स्टेबलाइजेशन तकनीक
ढलानों को सुरक्षित और स्थिर करने के लिए शिमला-कालका के कंडाघाट हिस्से में स्लोप कंक्रीट स्टेबलाइजेशन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीक के तहत सबसे पहले पहाड़ी की कटिंग के बाद ढलानों को साफ किया जाता है। इसके बाद इसके ऊपर विशेष कंक्रीट की परत चढ़ाई जाती है। कंक्रीट की परत चढ़ाने से पहले रॉक बोल्टिंग और स्टील जाल लगाकर कंक्रीट को मजबूती दी जाती है। यह परत पानी के रिसाव को रोकने में मदद करती है। इससे बारिश के दौरान ढलान के धंसने या टूटने की संभावना कम हो जाती है। स्टेबलाइजेशन के कार्य में इंजेक्शन ग्राउटिंग, रॉक बोल्टिंग, गनाइटिंग, और गेबियन वॉल जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल होता है।
विज्ञापन
बरसात के मौसम में भूस्खलन को रोकने में होगी मददगार, ड्रेनेज सिस्टम भी किया जाएगा दुरुस्त
11 किमी हिस्से में रहता हैै भूस्खलन का अधिक खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने शिमला-कालका फोरलेन के शोघी-कंडाघाट हिस्से पर कंक्रीट स्टेबलाइजेशन कार्य शुरू कर दिया है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बरसात के मौसम में भूस्खलन को रोकना और सड़क को सुरक्षित बनाना है।
दो सालों से फोरलेन पर एक तरफ लगातार भूस्खलन की समस्या बनी हुई है जिस कारण बरसात के मौसम में ट्रैफिक केवल एक ही ओर से चलाया जा रहा था। इससे वाहन चालकों को घंटों जाम में फंसना पड़ता था और यात्रियों के साथ स्थानीय निवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता था। कंक्रीट स्टेबलाइजेशन कार्य के तहत पहाड़ी ढलानों को मजबूती दी जाएगी, डंगे का निर्माण किया जाएगा, ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त किया जाएगा। इसमें अत्याधुनिक भूस्खलन रोधी तकनीकों का इस्तेमाल होगा। एनएचएआई ने साल के अंत तक इस कार्य को पूरा करने का लक्ष्य रखा है। एनएचएआई के साइट इंजीनियर योगेश ने बताया कि इस समय फोरलेन के शिमला से कंडाघाट तक के करीब 29 किलोमीटर हिस्से में निर्माण कार्य चल रहा है। इसका करीब 11 किलोमीटर पहाड़ी क्षेत्र सबसे अधिक संवेदनशील है। इस हिस्से में भूस्खलन का खतरा रहता है।
विज्ञापन
यदि समय पर यह कार्य पूरा हो जाता है तो फोरलेन न केवल सुरक्षित बनेगा, बल्कि पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। लगातार बढ़ते ट्रैफिक और दो वर्षों से भूस्खलन के चलते होने वाली परेशानियों को देखते हुए यह कार्य जरूरी है। एनएचएआई ने लोगों से अपील की है कि वह निर्माण कार्य के दौरान संयम बनाए रखें और यातायात नियमों का पालन करें। अधिकारियों ने भरोसा जताया कि इस परियोजना के पूरा होते ही शिमला-कालका फोरलेन देश के सबसे सुरक्षित और आधुनिक पहाड़ी मार्गों में शामिल होगा।
विज्ञापन
यह होती है कंक्रीट स्टेबलाइजेशन तकनीक
ढलानों को सुरक्षित और स्थिर करने के लिए शिमला-कालका के कंडाघाट हिस्से में स्लोप कंक्रीट स्टेबलाइजेशन तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीक के तहत सबसे पहले पहाड़ी की कटिंग के बाद ढलानों को साफ किया जाता है। इसके बाद इसके ऊपर विशेष कंक्रीट की परत चढ़ाई जाती है। कंक्रीट की परत चढ़ाने से पहले रॉक बोल्टिंग और स्टील जाल लगाकर कंक्रीट को मजबूती दी जाती है। यह परत पानी के रिसाव को रोकने में मदद करती है। इससे बारिश के दौरान ढलान के धंसने या टूटने की संभावना कम हो जाती है। स्टेबलाइजेशन के कार्य में इंजेक्शन ग्राउटिंग, रॉक बोल्टिंग, गनाइटिंग, और गेबियन वॉल जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल होता है।