थीम स्टेट हिमाचल के साथ सूरजकुंड मेले का रंगारंग आगाज, नाटी पर थिरके लोग
थीम स्टेट हिमाचल के साथ शनिवार को हरियाणा के फरीदाबाद में सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला 2020 का रंगारंग आगाज हुआ। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मेले का शुभारंभ किया। इस दौरान दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और मनोहर लाल खट्टर भी मौजूद रहे। मेले के शुभारंभ के बाद लोग हिमाचली नाटी(लोक नृत्य) पर जमकर थिरके। देश-विदेश के सैलानियों को हिमाचली धाम भी परोसी गई।
देवभूमि के विभिन्न जिलों के पारंपरिक उत्पाद मेले में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। सूरजकुंड मेला 16 फरवरी तक चलेगा। सीएम जयराम ने कहा कि विश्व के इस सबसे बड़े शिल्प मेले में हिमाचल को थीम राज्य बनने का विशेष सम्मान प्राप्त होने से प्रदेश की कला, संस्कृति एवं पर्यटन को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर मिला है। यह मेला हिमाचल के उत्पादों को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध होगा।
अंतर्राष्ट्रीय मेले के माध्यम से देश-विदेश के पर्यटकों को प्रदेश की संस्कृति में विविधता के बारे में जानकारी मिलेगी। शिल्पकारों, बुनकरों और कामगारों को सम्मान मिला है। जयराम ठाकुर ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले में भाग लेने का उद्देश्य हिमाचल के हथकरघा, हस्तशिल्प, फल उत्पाद, चाय, शहद, धातु शिल्प तथा व्यंजन को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का मंच प्रदान करना और राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा कि पर्यटकों तथा अन्य लोगों की सुविधा के लिए चंडीगढ़ से शिमला के लिए हेलीकाप्टर सेवा शुरू की गई है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति का प्रवेश द्वार धंतेश्वरी पर स्वागत किया और उन्हें हिमाचल की समृद्ध संस्कृति से अवगत करवाया। इस अवसर पर प्रदेश के कई मंत्री और अधिकारी भी मौजूद रहे।
कला-कौशल, प्रतिभा और उद्यमशीलता का स्थापित मंच : रामनाथ कोविंद
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला भारत के लोगों के कला-कौशल, प्रतिभा और उद्यमशीलता के प्रदर्शन का एक स्थापित मंच बन गया है। यह मेला विलुप्त हो रही हस्तशिल्प और हथकरघा की विशेष कला-विधाओं को संरक्षित करने, बढ़ावा देने और कारीगरों को उनके काम को प्रदर्शित करने का उचित मंच प्रदान कर रहा है।
भारत की सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारत त्योहारों और मेलों का देश है। इस मेले में शिल्पकारों और हथकरघा कारीगरों के अलावा विविध अंचलों के पहनावे, लोक-कलाओं, व्यंजनों, संगीत और लोक-नृत्यों का भी संगम होता है। इस मेले में भारत के गांवों की खुशबू और हमारी समृद्ध सांस्कृतिक के विविध रंग, यहां आने वालों को हमेशा आकर्षित करते रहेंगे।