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Hamirpur News: मधुमक्खियों को ठंड से बचाएगा परंपरागत मिट्टी का छत्ता, छात्रों ने किया तैयार
Mon, 16 Jan 2023 02:10 PM IST
अरविन्द ठाकुर
पंकज राणा, संवाद न्यूज एजेंसी, रंगस (हमीरपुर)
पंकज राणा, संवाद न्यूज एजेंसी, रंगस (हमीरपुर)
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 16 Jan 2023 02:10 PM IST
सार
मिट्टी के घरों में मधुमक्खियां आमतौर पर किसी भी जगह छेद मिलने पर अपना छत्ता तैयार करती हैं और वहां शहद उत्पादन करती हैं। उसी तर्ज पर परंपरागत तरीके से शोधार्थियों ने मिट्टी के छत्ते का निर्माण किया है।
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शोधार्थियों ने तैयार किया मिट्टी का छत्ता।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
अब ठंड से मधुमक्खियों की मौत नहीं होगी। मिट्टी का छत्ता (मड हाइव) मधुमक्खियों को गर्मी का एहसास करवाएगा। उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय हमीरपुर के शोधार्थियों ने परंपरागत मिट्टी का छत्ता तैयार किया है। महाविद्यालय में पढ़ाई करने वाले चतुर्थ वर्ष के छात्र ईएलपी (एक्सपीरियंस लर्निंग प्रोग्राम) के दौरान कीट विज्ञान विषय के विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र राणा के मार्गदर्शन में इस परियोजना पर काम कर रहे हैं।
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मिट्टी के छत्ते में मधुमक्खियों के लिए एक सामान्य तापमान की व्यवस्था की गई है। सर्दियों में ठंड बढ़ने से शहद के उत्पादन में भी काफी गिरावट आ जाती थी। अत्यधिक ठंड से कई मधुमक्खियां मर जाती हैं। इससे मौन पालन करने वालों को नुकसान होता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए शोधार्थियों ने शोध कार्य किया।
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मिट्टी के घरों में मधुमक्खियां आमतौर पर किसी भी जगह छेद मिलने पर अपना छत्ता तैयार करती हैं और वहां शहद उत्पादन करती हैं। उसी तर्ज पर परंपरागत तरीके से शोधार्थियों ने मिट्टी के छत्ते का निर्माण किया है। चतुर्थ वर्ष के एपीकल्चर और फल विज्ञान के छात्र विकास ठाकुर, अमिषा ठाकुर, रितिका व दिव्यांशी ने एक्सपीरियंस लर्निंग प्रोग्राम के दौरान परंपरागत तरीके से मिट्टी के छत्ते का निर्माण किया।
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इसमें शीघ्र मधुमक्खियों को शिफ्ट कर एक सामान्य तापमान की व्यवस्था करने के प्रयास किया जाएगा। उधर, महाविद्यालय के डीन डॉ. सोमदेव शर्मा ने कहा कि मधुमक्खियों के सरंक्षण के लिए परंपरागत तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए छात्रों समेत वैज्ञानिकों को भी प्रोत्साहित किया गया है। उन्होंने सभी छात्रों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।
ऐसे किया छत्ते का निर्माण
छत्ते में मिट्टी और घास का प्रयोग किया है। एक छत डालने के बाद उस पर टीन डाली गई है। मधुमक्खियों के लिए आमतौर पर 32 से 35 डिग्री का तापमान उपयुक्त होता है। सामान्य तापमान में ही मधुमक्खियां शहद का उत्पादन ठीक मात्रा में कर पाती हैं।
वर्तमान में महाविद्यालय में एपिस मेलीफेर, लिंगाीष्टका और सीरेना प्रजाति की मधुमक्खियों का पालन किया गया है। मधुमक्खियों को ठंड से बचाने के चलते संरक्षण देने के बारे में अध्ययन किया जा रहा है। मिट्टी के छत्ते का तापमान सर्दियों में 5 डिग्री ज्यादा और गर्मियों में 5 डिग्री कम होता है। इसलिए निश्चित तौर पर मधुमक्खियों को बढ़ती ठंड से संरक्षण मिलेगा।