'बीसीसीआई जमीन मांगे तो विचार किया जाएगा'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा है कि बीसीसीआई या अखिल भारतीय स्तर की कोई मान्य संस्था राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी बनाने के लिए जमीन मांगे तो इस पर विचार हो सकता है। एचपीसीए पहले अपना स्टेटस दुरुस्त करे और नियमानुसार सोसाइटी बने, तभी ऐसे प्रस्ताव को मंजूर किया जा सकता है।
वीरभद्र सिंह ने बुधवार को राज्य सचिवालय शिमला में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत की। पत्रकारों ने उनसे सवाल किया कि क्या राज्य सरकार अनुराग ठाकुर के राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी खोलने के लिए जमीन देने के प्रस्ताव पर गौर करेगी कि नहीं? इस पर वीरभद्र ने कहा कि हिमाचल में क्रिकेट को गलत लोगों की गेम बना दिया गया है। हम ऐसे लोगों के अस्तित्व को नहीं मानते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार क्रिकेट के खिलाफ नहीं है। राज्य सरकार सभी खेलों को प्रोत्साहित करना चाहती है।
जल्दी होना चाहिए खेल विधेयक पर फैसला- क्या राज्यपाल खेल विधेयक को लंबा अटका सकते हैं? इस सवाल पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि खेल विधेयक पर कोई भी फै सला जल्दी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को लाने में राज्य सरकार का किसी तरह कोई गलत इरादा नहीं है। अगर इस विधेयक को मंजूरी नहीं देनी है तो इसे रद्द ही कर दिया जाए।
एचपीसीए ने एनसीए के लिए सरकार से मांगी जमीन
धर्मशाला में राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी खुलवाने को लेकर एचपीसीए सक्रिय हो गई है। एचपीसीए ने धर्मशाला में कम से कम 50 हजार स्क्वेयर मीटर जमीन लीज पर देने के लिए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को पत्र लिखा है। एचपीसीए के सचिव विशाल मरवाह ने 18 अगस्त को यह पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में मुख्यमंत्री से मांग की है कि राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के लिए कम से कम 50 हजार स्क्वेयर मीटर जमीन की जरूरत पड़ेगी।
यह जमीन एचपीसीए को क्रिकेट स्टेडियम धर्मशाला के आसपास पांच किलोमीटर के दायरे में ही चाहिए। बीसीसीआई राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी को बंगलूरू से भारत के किसी दूसरे कोने में शिफ्ट करना चाहती है। ऐसे में हिमाचल के पास सुनहरा अवसर है कि राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी यहां खुले। हिमाचल में राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी खुलने से सूबे के नौजवान क्रिकेटरों को लाभ मिलेगा। स्थानीय कारोबार में भी बूम आएगा।
मानसून सत्र में विपक्ष से सहयोग की उम्मीद- वीरभद्र सिंह ने 21 अगस्त से शुरू होने जा रहे मानसून सत्र में विपक्ष से सहयोग की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को सदन में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। हम भी सबको सुनते हैं। जो फैसला होता है, वह बहुमत का ही होता है।
सदन में सबको शालीनता से पेश आना चाहिए और कानून के दायरे में ही रहना चाहिए। नियमों के अनुसार चर्चा होनी चाहिए। शोर-शराबे में नहीं होनी चाहिए। हालांकि, दिल्ली में हाउस नहीं चलने देने पर शांता कुमार की ओर से भत्ते छोड़ने के ऐलान के मामले में वीरभद्र ने कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की।