शिक्षकों के लिए बुरी खबर, यकीन कीजिए
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सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चे अब शिक्षकों पर भारी पड़ेंगे। ये बच्चे अब शिक्षकों की नौकरी भी ले सकते हैं। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि सरकारी स्कूलों में खराब रिजल्ट आने पर अब शिक्षकों को ट्रांसफर नहीं, बल्कि उन्हें डिसमिस किया जाएगा। शिक्षकों से जवाब तलबी के बाद उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। पालमपुर के मनियाड़ा में जनसभा के दौरान सीएम ने कहा कि प्रदेश में जल्द ही वाल्मीकि कल्याण बोर्ड का गठन किया जाएगा।
ये बोर्ड भी अन्य समुदाय के बोर्डों की तर्ज पर गठित होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कुछ सरकारी स्कूलों के पांचवीं के बच्चों को दूसरी कक्षा के सवाल हल करने नहीं आ रहे हैं। छात्रों में इस कमी का कारण अध्यापक भी हैं। कई अध्यापक अच्छे हैं तो कई फरलू मारने में माहिर हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों से अच्छे अध्यापक हैं।
'मनरेगा बजट पर लोगों को गुमराह कर रहे धूमल'
निजी स्कूलों में पढ़ाई कम और दिखावा अधिक है। निजी स्कूल शिक्षा को व्यापार बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में अब पहली से ही हिंदी, हिसाब और अंग्रेजी पढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से मनरेगा का बजट कम आ रहा है। प्रदेश के हिस्से का बजट 761.71 करोड़ है लेकिन अब तक यह 355.43 करोड़ रुपये ही आया।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के ब्यान पर चुटकी ली कि वह मनरेगा बजट पर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि धूमल के जरिये केंद्र सरकार ने मनरेगा का बजट भेजा हो तो वह प्रदेश सरकार को दे दें।
वीसी के बायोडाटा में कोई गड़बड़ी नहीं- मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कृषि विवि के कुलपति के बायोडाटा को लेकर उठ रहे सवाल पर कहा कि यह मामला राज्यपाल के अधीन आता है। अब तक प्रदेश सरकार के सामने आई जांच में वीसी के बायोडाटा में कुछ गलत नहीं पाया गया है।