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वीरभद्र सिंह मनी लॉंड्रिंग केस, ईडी की चार्जशीट पर सीबीआई कोर्ट ने लिया संज्ञान

Thu, 08 Sep 2016 04:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 08 Sep 2016 04:20 PM IST
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CM Virbhadra Singh Money Laundering case: cbi court takes cognisance over ED Chargesheet

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बीमा एजेंट आनंद सिंह चौहान के खिलाफ मनी लॉंड्रिंग मामले में विशेष सीबीआई कोर्ट ने संज्ञान ले लिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को चार्जशीट कोर्ट में पेश की थी। प्रवर्तन निदेशालय ने चौहान को चंडीगढ़ से आठ जुलाई 2016 को गिरफ्तार किया था। उसे न्यायिक हिरासत से कोर्ट में पेश किया गया। बचाव पक्ष जल्द ही हाईकोर्ट में उसकी जमानत याचिका दायर करेगा।

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पटियाला हाउस स्थित विशेष सीबीआई जज विनोद कुमार ने ईडी की चार्जशीट पर बुधवार को संज्ञान ले लिया। उस समय आनंद सिंह चौहान कोर्ट में मौजूद था। कोर्ट ने तभी चार्जशीट की कॉपी व अन्य दस्तावेज चौहान को देने का निर्देश दिया। चार्जशीट पर अगली सुनवाई 26 सितंबर को होगी।
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प्रवर्तन निदेशालय ने तीन हजार पन्नों की चार्जशीट मनी लांड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट (पीएमएलए) के तहत चार्जशीट दाखिल की है। एजेंसी का आरोप है कि चौहान ने वीरभद्र सिंह से 5.14 करोड़ रुपये कैश लिया और अपने पंजाब नेशनल बैंक के खाते में जमा कराया और उसके बाद वीरभद्र व उनके परिजनों के नाम पर बीमा पॉलिसी खरीद कर निवेश कर दिया। बैंक खाते में मोटी रकम जमा होने के कारण वह आयकर विभाग की नजर में आ गया। आयकर विभाग ने चौहान के खिलाफ 2011 में जांच शुरू की थी।

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कालेधन के लिए वीरभद्र व चौहान के बीच हुआ फर्जी समझौता

CM Virbhadra Singh Money Laundering case: cbi court takes cognisance over ED Chargesheet

ईडी का कहना है कि इस कालेधन के लेनदेन को जायज ठहराने के लिए वीरभद्र व चौहान के बीच 15 जून 2008 की तारीख का एक फर्जी समझौता किया गया। यह समझौता 2011 में किया गया, लेकिन इसके लिए 2008 के स्टांप पेपर का इस्तेमाल किया गया। इसके मुताबिक शिमला के एक गांव दमराली स्थित सेब के बगीचे श्रीखंड ओर्चिड (बगीचा) का प्रबंधन वीरभद्र सिंह ने चौहान को सौंपा था।

इस समझौते के मुताबिक श्रीखंड ओर्चिड से होने वाली कमाई को सरकारी प्रतिभूति, एलआईसी, म्युचुअल फंड व सरकारी बैंकों में निवेश करना था ताकि अच्छा रिटर्न मिले। इस बगीचे से होने वाली सेब की बिक्री पर दो फीसदी कमीशन चौहान को मिलना था। पूछताछ में चौहान ने बताया कि जो राशि उसने वीरभद्र व उनके परिजनों के नाम पर एलआईसी में निवेश की है वह रकम सेब की बिक्री से आई है।

श्रीखंड ओर्चिड के सेब परवानू स्थित यूनिर्वसल एपल एसोसिएशन के चुन्नी लाल चौहान को बेचे गए। ईडी का कहना है कि समझौत के लिए जिस स्टांप पेपर का इस्तेमाल किया गया वह किसी अन्य शख्स के नाम पर बेचा गया था, जिसने कोठकाई शिमला स्थित यूको बैंक से कोई समझौता किया था।

जांच एजेंसी का कहना है कि वीरभद्र सिंह ने 2009 से 2011 के बीच केंद्रीय इस्पात मंत्री रहते हुए छह करोड़ की अघोषित संपत्ति अर्जित की। यह संपत्ति उनकी घोषित आय से अधिक थी। सीबीआई भी वीरभद्र के खिलाफ जांच कर रही है।

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