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5200 करोड़ की योजना मंजूर, कहां कितना पैसा होगा खर्च

Mon, 15 Feb 2016 07:51 PM IST
Updated Mon, 15 Feb 2016 07:51 PM IST
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CM Virbhadra Singh in Planning Board Meeting.

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा है कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2016-17 के लिए 5200 करोड़ रुपये की वार्षिक योजना को स्वीकृति प्रदान की है। यह योजना वर्ष 2015-16 की वार्षिक योजना के आकार से 8.33 प्रतिशत अधिक है। वीरभद्र सिंह ने कहा कि वार्षिक योजना 2016-17 में सामाजिक सेवा क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए इस क्षेत्र को 1992 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। ये कुल योजना आकार का 38.31 प्रतिशत है।

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प्राथमिकता के क्रम में परिवहन और संचार सेवाओं के लिए 979.04 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं, जो वार्षिक योजना का 18.83 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह योजना आकार को तय करने के लिए सोमवार को योजना बोर्ड की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य की कुल वार्षिक योजना में अनुसूचित जाति की आबादी को लाभान्वित करने के लिए अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत 1309.88 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जो कुल योजना आकार का 25.19 प्रतिशत है।
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जनजातीय क्षेत्र उपयोजना और पिछड़ा क्षेत्र उपयोजना के लिए 468 करोड़ रुपये रुपये मंजूर किए गए हैं। जो योजना आकार का 9 प्रतिशत है। कृषि, बागवानी, पशुपालन, वन, सिंचाई, सड़कें, शिक्षा, स्वास्थ्य इत्यादि विकास शीर्षों के लिए 65 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। ऊर्जा क्षेत्र उनकी प्राथमिकताओं में से एक है और इसके लिए 683 करोड़ रुपये का प्रस्ताव है।

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कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए 586 करोड़ रुपये

CM Virbhadra Singh in Planning Board Meeting.

इसमें राज्य ऊर्जा निगम और हिमाचल प्रदेश ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड की ओर से कार्यान्वित एशियन विकास बैंक की वित्तपोषित परियोजनाओं की ऋण और हिस्सेदारी भी शामिल है। कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के लिए 586 करोड़ रुपये की वार्षिक योजना प्रस्तावित है, जो कुल योजना का 11.26 प्रतिशत है। इसमें राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत बाह्य सहायता परियोजनाएं और योजनाएं शामिल हैं।

सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री विद्या स्टोक्स, स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर, परिवहन मंत्री जीएस बाली, कृषि एवं बहुउद्देशीय ऊर्जा मंत्री सुजान सिंह पठानिया, शहरी विकास मंत्री सुधीर शमा, आबकारी एवं कराधान मंत्री प्रकाश चौधरी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डा. कर्नल धनीराम शांडिल, सहकारिता मंत्री कर्ण सिंह, मुख्य संसदीय सचिव, विधायक, योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष जीआर मुसाफिर, विभिन्न बोर्डों, निगमों के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने सड़कों के दोनों ओर अंधाधुंध केबल बिछाने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि इससे दुर्घटनाएं हो रही हैं। ठेके मेरिट के आधार पर दिए जाने चाहिए। राज्य सरकार 15 वर्ष से 45 वर्ष आयु वर्ग के और अधिक युवाओं को कौशल विकास योजना के दायरे में लाने के लिए प्रयासरत है। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से 640 करोड़ रुपये की धनराशि मंजूर की गई है। इससे राज्य सरकार की ओर से कौशल विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को और बल मिलेगा।

पड़ोसी राज्यों के मुकाबले रोजगार का अनुपात हिमाचल में ज्यादा

CM Virbhadra Singh in Planning Board Meeting.

हिमाचल का सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार का अनुपात 28 प्रतिशत है, जो अन्य पड़ोसी राज्यों के मुकाबले काफी अधिक है। पंजाब में यह अनुपात 11 प्रतिशत, बिहार में 12 प्रतिशत, हरियाणा में 14 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 10 प्रतिशत है। पर्यटन और जलविद्युत राज्य की आर्थिकी का मुख्य आधार होने के कारण पर्यटन क्षेत्र में बजट परिव्यय में बढ़ोतरी के सुझाव भी प्राप्त हुए।

वार्षिक योजना के लिए केंद्रीय सहायता बंद, तीन हजार करोड़ रुपये का नुकसान-
केंद्र सरकार ने वार्षिक योजना के लिए मिलने वाली सभी तरह की केंद्रीय सहायता बंद कर दी है। पहले की तरह अब वार्षिक योजना के तहत प्रदेश को सामान्य केंद्रीय सहायता, विशेष केंद्रीय सहायता और विशेष योजना सहायता नहीं मिलेगी।

इससे हिमाचल को सालाना करीब तीन हजार करोड़ रुपये का नुकसान होगा। नीति आयोग बनने के बाद ही यह सहायता बंद कर दी गई है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सोमवार को प्रदेश योजना बोर्ड की बैठक में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और नीति आयोग के समक्ष ये मामला उठाया जा चुका है।

प्रायोजित योजनाओं में कटौती न करे केंद्र: वीरभद्र

CM Virbhadra Singh in Planning Board Meeting.

हिमाचल को चालू वित्त वर्ष में भी केंद्रीय सहायता के रूप में करीब 3000 करोड़ रुपये नहीं मिले हैं। यह सहायता के आगामी वित्त वर्ष में भी नहीं मिलेगी। इस केंद्रीय सहायता में सालाना औसतन 10 फीसदी की बढ़ोतरी होती थी। ऐसे में राज्य सरकार वार्षिक योजना के लिए या तो अपने संसाधनों से ही पैसे जुटा रही है।

सोमवार को योजना बोर्ड की बैठक में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि विशेष श्रेणी राज्यों में हिमाचल भी शामिल है। ऐसे में हिमाचल को ये सहायता मिलनी चाहिए। उधर, योजना और वित्त विभाग देख रहे अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीकांत बाल्दी ने बताया कि न तो चालू वित्त वर्ष में केंद्रीय सहायता मिल पाई है और न ही आगे मिल पाएगी।

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि केंद्र प्रायोजित योजनाओं में केंद्रीय हिस्सेदारी में कटौती न करने और सभी योजनाओं में 90:10 की हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए केंद्र एवं नीति आयोग के समक्ष मामला उठाया जा रहा है।

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