अफसरशाही ने कैबिनेट को किया गुमराह, सीएम वीरभद्र ने रोका फैसला
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने पूर्व सैनिक कोटे की सरकारी नौकरी में सेना के सेवाकाल का लाभ खत्म करने के कैबिनेट निर्णय पर रोक लगा दी है। इसकी अधिसूचना आज-कल में जारी होने वाली थी। पूर्व सैनिकों के विरोध के चलते सीएम ने धर्मशाला में इसका एलान किया।
नियम 5 (1) के तहत कोटे में पूर्व सैनिकों के ज्वाइन करने पर उनकी वरिष्ठता में सैन्य सेवाकाल जुड़ता है। इसे कैबिनेट ने बीते 5 अगस्त को खत्म करने का फैसला ले लिया था जबकि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
अब मुख्यमंत्री के कैबिनेट निर्णय पर रोक लगाने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। जब मामला सुप्रीम कोर्ट में है तो अफसरशाही ने प्रस्ताव तैयार क्यों किया?
सूत्रों की मानें तो अफसरशाही जानती थी कि मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी है और कभी भी फैसला आ सकता है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार क्यों नहीं किया?
आखिर मंत्रिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्यों नहीं किया इंतजार
बहरहाल, कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे पूर्व सैनिकों को फौरी राहत मिली है। हालांकि, उनका कहना है कि इस मामले में अफसरशाही ने सरकार को गुमराह किया है। वर्ष 2007 में हाईकोर्ट ने कार्मिक विभाग के वर्ष 1972 से लागू नियम 5 (1) के विरुद्ध आदेश सुनाया था, लेकिन तब सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया।
हाईकोर्ट के फैसले के विरोध में पूर्व सैनिकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के आदेश को प्रभावी बनाने की जगह यथा स्थिति बनाने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा है। इस बीच मंत्रिमंडल में कार्मिक विभाग की ओर से यह प्रस्ताव लाया गया।
मंत्रिमंडल ने प्रस्ताव पर मुहर लगा दी, लेकिन निर्णय को गोपनीय रखते हुए सरकार की ओर से जारी कैबिनेट निर्णयों की सूची में भी शामिल नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट कभी भी इस मामले में निर्णय सुना सकता है, ऐसे में इस प्रस्ताव को मंत्रिमंडल में लाने के औचित्य पर पूर्व सैनिकों ने सवाल खड़ा किया है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला होगा प्रभावी: वीरभद्र
धर्मशाला में पूर्व सैनिकों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें मामले की हकीकत से अवगत करवाया। मुख्यमंत्री ने कार्मिक विभाग के वर्ष 1972 से लागू नियम 5 (1) को खत्म करने के निर्णय पर कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान घोषणा कर रोक लगा दी है।
सीएम ने कहा कि पूर्व सैनिक कोटे से राजकीय सरकारी सेवाओं में आने वाले फौजियों की नौकरी में सैन्य सेवाओं की वरिष्ठता नहीं जोड़ने की अधिसूचना वापस ली जा रही है। उन्होंने कहा कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है, इसलिए हिमाचल सरकार अधिसूचना को वापस लेती है।
प्रमोशन का है असल खेल
जानकारों की मानें तो पूर्व सैनिक कोटे में नियम 5 (1) का प्रभावी होना अफसरों को अखर रहा था। इस नियम से पूर्व सैनिक कोटे से नौकरी वाले अपने बैच के एचएएस या अन्य सेवाओं वाले कर्मचारियों से सीनियर हो जाते हैं। वरिष्ठता सूची में पिछड़ने की खीज लंबे समय से अन्य अफसरों की लॉबी को खल रही थी।
सरकार को गुमराह कर रही अफसरशाही: खुशहाल
ब्रिगेडियर खुशहाल ठाकुर (रि.) ने कहा है कि प्रदेश सरकार को अफसरशाही गुमराह कर रही है। नेताओं के पास मामलों को समझने का समय नहीं है। सरकार आनन-फानन में इस तरह के फैसले ले रही है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना सही निर्णय है। कोर्ट का फैसला सभी को मान्य होगा। बीते दिनों कैबिनेट द्वारा लिए गए फैसले ने वीरभूमि के जवानों को बहुत निराश किया है।