फीस बढ़ोत्तरीः आखिरकार छात्रों के आगे झुकी सरकार
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की ओर से फीस बढ़ोत्तरी का फैसला कितना उचित है? इसकी पड़ताल सरकार की ओर से गठित की जाने वाली तीन सदस्य समिति करेगी। उच्च न्यायालय के किसी भी रिटायर न्यायाधीश को समिति का अध्यक्ष बनाया जाएगा।
सोमवार को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की ओर से यह घोषणा एनएसयूआई के एक प्रतिनिधि मंडल के मुलाकात के दौरान की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि समिति एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। उसके के अनुसार आगे फैसला लिया जाएगा।
वीरभद्र सिंह ने कहा कि छात्र समुदाय के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा। किसी को भी शिक्षण संस्थानों में शिक्षा के माहौल को बिगाड़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
एक महीने में सौंपी जाएगी रिपोर्ट
उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय स्वतंत्र समिति गठित की जाएगी, जो एक महीने के भीतर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में फीस बढ़ाने से संबंधित पूरे मामले तथा अन्य संबंधित मामलों पर रिपोर्ट सौंपेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से शिक्षा शुल्क तथा होस्टल शुल्क में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। एनएसयूआई प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में फीस बढ़ोतरी से उत्पन्न स्थिति से अवगत करवाया।
मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि कुछ निश्चित मामलों में फीस में व्यापक बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने छात्र समुदाय के व्यापक हितों के मद्देनजर इस पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।
सीएम ने दिया आश्वासन
उन्होंने शिक्षण संस्थानों में कानून व्यवस्था कायम कर अकादमिक वातावरण के पुनर्बहाली का भी आग्रह किया। वीरभद्र सिंह ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के परिसर में बाहरी लोगों को प्रवेश की अनुमति न देने के उनके आग्रह पर विचार किया जाएगा।
संबंधित प्रशासन को उपयुक्त कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने प्रधान सचिव शिक्षा, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी बैठक की और शिक्षण संस्थानों में अकादमिक वातावरण बनाएं रखने के लिए उपयुक्त कदम उठाने के निर्देश दिए।