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Himachal News: सीएम सुक्खू बोले- आबकारी नीति से 15 साल बाद हुई 25 प्रतिशत की राजस्व वृद्धि

Tue, 25 Apr 2023 06:57 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 25 Apr 2023 06:57 PM IST
सार

प्रदेश में 15 साल बाद आबकारी नीति से राजस्व में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। वित्त वर्ष 2023-24 के लिए राजस्व अर्जन में 40 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2,800 करोड़ रुपये अर्जित किए गए।

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CM sukhvinder singh Sukhu said 25 percent increase in revenue after 15 years from excise policy
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में 15 साल बाद आबकारी नीति से राजस्व में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। वित्त वर्ष 2023-24 के लिए राजस्व अर्जन में 40 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2,800 करोड़ रुपये अर्जित किए गए। शराब की दुकानों की नीलामी एवं निविदा से 1,815 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित हुआ है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बताया कि प्रदेश सरकार राज्य की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रयास कर रही है। इसके लिए वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के साथ-साथ राजस्व अर्जन के साधनों को बढ़ाया जा रहा है। आबकारी नीति को व्यावहारिक बनाया गया है। वित्त वर्ष 2023-24 में आबकारी नीति से अपेक्षित 2,357 करोड़ रुपये के राजस्व की तुलना में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि के साथ राज्य कोष में 2,800 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित हुआ है। पिछले लगभग 15 वर्षों में राज्य सरकार की आबकारी नीति के तहत राजस्व अर्जित 25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज नहीं की गई थी जबकि वर्ष 2011-12 में राजस्व में 25.65 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी।

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बीते वित्तीय वर्ष में पिछली सरकार के शासन के दौरान शराब की दुकानों का नवीनीकरण के माध्यम से 1,296 करोड़ रुपये अर्जित किए गए, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल के दौरान वर्तमान वित्त वर्ष के दौरान नीलामी एवं निविदा से 1,815 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया गया जो 520 करोड़ रुपये अधिक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार द्वारा शराब की दुकानों के नवीनीकरण के निर्णय से सरकारी कोष को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है। वर्तमान राज्य सरकार ने शराब की दुकानों की नीलामी करने और समग्र राजस्व बढ़ाने के लिए आबकारी नीति में नवीन उपाय किए हैं। सरकार के नीतिगत निर्णय से दुकानों की नीलामी में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित हुई है और इसमें पारदर्शी प्रक्रिया का पालन किया गया है। वर्ष 2023-24 की आबकारी नीति में सरकारी राजस्व में वृद्धि करने, शराब की कीमतों में कमी और पड़ोसी राज्यों से इसकी तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं।
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देसी शराब का निर्धारित कोटा 7.5 प्रतिशत और भारत में निर्मित विदेशी शराब (आईएमएफएल) का निर्धारित कोटा 5 प्रतिशत बढ़ाया गया है। थोक दुकानों के लिए वार्षिक निर्धारित लाइसेंस शुल्क को 20 लाख बढ़ाकर 35 लाख रुपये, वित्तीय वर्ष के लिए न्यूनतम गारंटीकृत मात्रा उठाने के बाद, अतिरिक्त कोटा उठाने के लिए लाइसेंसधारियों को निर्धारित लाइसेंस शुल्क 80 प्रतिशत के साथ 10 प्रतिशत तक कोटा उठाने की अनुमति दी गई है। इसके अतिरिक्त लाइसेंसधारक को निर्धारित लाइसेंस शुल्क के 90 प्रतिशत की दर से 10 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक कोटा उठाने की अनुमति दी गई है। राज्य सरकार के इन सभी उपायों से अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब उत्पादन के संचालन, थोक विक्रेताओं को इसकी आपूर्ति और खुदरा विक्रेताओं को बाद में बिक्री की निगरानी के लिए सभी हितधारकों को अपने प्रतिष्ठानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, राज्य की वाइनरी में आयातित शराब की बॉटलिंग की अनुमति दी गई है। वर्तमान आबकारी नीति में एल-3, एल-4 और एल-5 लाइसेंसधारकों को तीन सितारा होटलों के सभी कमरों में रहने वालों के लिए मिनी बार की अनुमति दी गई है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ राज्य में राजस्व के स्रोत भी बढ़ेंगे। राज्य सरकार ने शराब की प्रत्येक बोतल पर 10 रुपये दूध उपकर लगाया है जिससे 100 करोड़ रुपये अतिरिक्त राजस्व अर्जित होगा। सरकार द्वारा इस फंड का उपयोग किसानों की बेहतरी और दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा।

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