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Himachal News: मुख्यमंत्री सुक्खू बोले-30 नवंबर तक हर व्यक्ति का बनेगा स्वास्थ्य पहचान पत्र

Fri, 13 Oct 2023 10:48 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 13 Oct 2023 10:48 PM IST
सार

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य पहचानपत्र में मरीज की स्वास्थ्य संबंधी पूरी जानकारी होगी। इससे चिकित्सकों को इलाज करने में सहूलियत होगी। 

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cm Sukhu said Health identity card will be made for every person by 30th November.
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने डाली नाटी। - फोटो : संवाद

विस्तार

राज्य में 30 नवंबर तक प्रत्येक व्यक्ति का स्वास्थ्य पहचान पत्र (हेल्थ आईडी कार्ड) तैयार कर लिया जाएगा। आईजीएमसी के वार्षिक कार्यक्रम स्टिमुलस के समापन कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अटल सभागार के मंच पर यह बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य पहचानपत्र में मरीज की स्वास्थ्य संबंधी पूरी जानकारी होगी। इससे चिकित्सकों को इलाज करने में सहूलियत होगी। वहीं एक वर्ष में उच्च स्तरीय अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

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उन्होंने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए प्रदेश सरकार पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक-एक आदर्श स्वास्थ्य संस्थान स्थापित किए जा रहे हैं। इस अवसर पर उन्हों आईजीएमसी शिमला की एससीए को 5 लाख रुपये देने की घोषणा की। वहीं मेधावी विद्यार्थियों को पुरस्कार भी बांटे। स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। उन्होंने आईजीएमसी के स्थापना दिवस पर भी बधाई दी।
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अस्पताल में विभिन्न श्रेणियों के 778 पद खाली
आईजीएमसी कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को अस्पताल में खाली पदों के बारे में अवगत करवाया। कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष हरिंद्र सिंह मेहता, महासचिव हनीश ठाकुर ने मुख्यमंत्री को बताया कि अस्पताल में नर्सिंग, पैरामेडिकल, मिनिस्ट्रीयल, स्पोर्टिंग व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के कुल 778 पद खाली हैं। कर्मचारियों के लिए बसों की सुविधा नहीं है। जिस वजह से सुबह व रात्रि शिफ्टों में ड्यूटी देने आने वाले कर्मचारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं हाउस अलॉटमेंट की बैठक नहीं हो रही है। आरकेएस कर्मचारियों के आठ साल पूरे होने के बाद भी उन्हें नियमित पे स्केल नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा नर्सिंग एस्टेबलिशमेंट अलग होने संबंधी मुद्दों के बारे में अवगत करवाया।
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आपदा राहत कोष में दिए 6.11 लाख रुपये
आईजीएमसी के सीएसए, आरडीए, सेमडिकोट, कर्मचारी संघ की ओर से आपदा राहत कोष में छह लाख रुपये का चेक भेंट किया गया। इसके अलावा सीएम ने 15 से 17 मार्च, 2024 तक मनाली में आयोजित होने वाली वार्षिक नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन का पोस्टर भी जारी किया।

84 साल में भी फिट है शांडिल
सीएम ने कहा कि हमने धनीराम शांडिल को इसलिए मंत्री बनाया है क्योंकि 84 साल में भी पूरी तरह फिट हैं और अभी तक एक भी ऑपरेशन नहीं हुआ है। इस पर सभागार तालियों से गूंज उठा।

युवा चिकित्सकों को दिया संदेश
सीएम सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने युवा चिकित्सकों को प्रोत्साहित करते हुए संदेश दिया कि जीवन में हार से घबराने की जरूरत नहीं है। सभी प्रशिक्षु लक्ष्य निर्धारित कर कड़ी मेहनत करें। उन्होंने कहा कि मेहनत के बिना जीवन में किसी भी मुकाम तक नहीं पहुंचा जा सकता है।

प्रदेश में भूकंपरोधी भवन बनाने की सस्ती तकनीक उपलब्ध करवाएगा सीबीआरआई

केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) रुड़की हिमाचल प्रदेश को भूकंपरोधी भवन बनाने की सस्ती तकनीक उपलब्ध करवाएगा। संस्थान प्रदेश को आपदा से निपटने के लिए प्रशिक्षण भी देगा। इसके लिए कांगड़ा के रैत में प्रदर्शन संरचना बनाई जाएगी, जहां मॉडल के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाएगा। भूकंपरोधी भवन निर्माण के लिए क्षमता संवर्धन के तहत ग्रामीण स्तर पर भवन निर्माण करने वालों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। भूकंपरोधी भवन निर्माण के लिए सीबीआरआई प्रदेश सरकार को सुझाव भी देगा। शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद (हिमकाॅस्ट) और सीबीआरआई के बीच एमओयू हस्ताक्षरित हुआ।

हिमकॉस्ट के सदस्य सचिव डीसी राणा की और सीबीआरआई के मुख्य वैज्ञानिक डाॅ. अजय चौरसिया और एसके नेगी ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए। सीबीआरआई के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. अजय चौरसिया ने कहा कि हिमाचल में विशेषज्ञों की सलाह के बगैर किया जा रहा अनियंत्रित निर्माण और मानकों की अनदेखी से भूकंप के कारण जानमाल का अधिक नुकसान होने का खतरा है। भवन निर्माण में परंपरागत धज्जी दीवारों को प्राथमिकता देकर भूकंप के नुकसान से बचा जा सकता है। पुराने समय के मुकाबले अब निर्माण के लिए अधिक मात्रा में लकड़ी उपलब्ध नहीं है। सीबीआरआई सस्ती और सुलभ तकनीक की जानकारी मुहैया करवाएगा। बताया कि कैसे हल्के बदलाव कर भवन को भूकंपरोधी बनाया जा सकता है। 

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