हिमाचल: लोकतंत्र को बचाने वाले प्रहरियों को 45 साल बाद मिला सम्मान
- लोकतंत्र को बचाने वाले प्रहरियों को 45 साल बाद मिला सम्मान
- सीएम जयराम ने सम्मानित किए 81 लोकतंत्र प्रहरी व परिवार
- शिमला के होटल पीटरहॉफ में आयोजित हुआ भव्य कार्यक्रम
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45 साल पहले 1975 में देश में लगाए गए आपातकाल के दौरान लोकतंत्र बचाने के लिए जेल जाने वाले 81 लोकतंत्र प्रहरियों को हिमाचल प्रदेश सरकार ने रविवार को होटल पीटरहॉफ में आयोजित भव्य कार्यक्रम में सम्मानित किया। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस अवसर पर सभी लोकतंत्र प्रहरियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि आपातकाल स्वतंत्र भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जिन लोगों ने आपातकाल के खिलाफ आवाज उठाई और कड़ा संघर्ष किया वह हमारे इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और युवाओं और भावी पीढ़ी को इससे परिचित होना चाहिए।
सीएम ने कहा कि आम तौर पर लोग कठिन समय को भूल जाते हैं लेकिन आपातकाल के समय को कभी नहीं भूलना चाहिए क्योंकि इस दौर से बहुत कुछ सीखने को मिला है। उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 की आधी रात को आपातकाल लगाया गया था जो 21 मार्च 1977 तक 21 माह तक रहा। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति अपना अपना कार्य कर रहा था और हालात सामान्य थे। कानून व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में थी और आपातकाल लगाने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने कहा कि किसी ने भी इसके बारे में सोचा नहीं था। मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदिरा गांधी ने रायबरेली लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और भारी अंतर से जीती, जिसे उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इंदिरा गांधी को चुनावी भ्रष्टाचार का दोषी पाया और रायबरेली लोकसभा क्षेत्र के चुनावी निर्णय को खारिज कर दिया और छह साल के लिए निर्वाचित पद पर रहने की रोक लगा दी। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी सत्ता छोड़ने के लिए तैयार नहीं थीं इसलिए आपातकाल लगाया गया था। इस दौरान सरकार ने आम लोगों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित कर दिया था और कोई भी व्यक्ति सरकार के खिलाफ आवाज नहीं उठा सकता था। इस अवसर पर आपातकाल पर बनाए गए एक वृतचित्र को भी दिखाया गया। कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह ठाकुर, नगर निगम की महापौर सत्या कौंडल आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
भारद्वाज बोले- प्रहरियों के इतिहास को संजोकर किताब की जाएगी तैयार
लोकतंत्र प्रहरी समिति के अध्यक्ष एवं शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने आपातकाल को याद करते हुए कहा कि आपातकाल का समय लोकतंत्र के इतिहास में एक काला अध्याय है। खुद आपातकाल के समय जेल में रहे भारद्वाज ने कहा कि देश के इतिहास के इस हिस्से और उस दौरान जेल गए लोगों की कुर्बानियों के इतिहास को एक किताब के रूप में संजोकर लोगों तक पहुंचाया जाएगा ताकि लोग जान सकें कि कब क्या हुआ और लोकतंत्र को बचाने में किसका क्या योगदान रहा।