हिमाचल में 100 रुपये बैंक में जमा तो कर्ज केवल 35.47 रुपये, कम लोनिंग विकास में बड़ी बाधा
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हिमाचल के लोग बैंकों से कम कर्ज ले रहे हैं। इससे ज्यादा निवेश नहीं बढ़ पा रहा है और नतीजे में राज्य की आमदनी नहीं बढ़ पा रही है। अगर हिमाचलियों का बैंकों में जमा पैसा 100 रुपये है तो वह महज 35.47 रुपये ही कर्ज ले रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर 100 रुपये के जमा पर 75.64 रुपये लोन लिया जा रहा है। यह खुलासा राज्य सचिवालय में राज्य स्तरीय बैंकर्ज सम्मेलन में हुआ। इसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने की।
मुख्यमंत्री ने बैंकों को अपनी नीति के सरलीकरण की सलाह दी और कहा कि छोटे उद्यमियों की मदद को सहकारी बैंक लाने के प्रयास किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बैंकरों को लक्षित क्षेत्रों कृषि, पर्यटन, बागबानी, सेवा क्षेत्रों के विकास के लिए ऋण-जमा अनुपात को बढ़ावा देना चाहिए। ऋण नीति तैयार की जानी चाहिए।
किसानों को ऋण लेने को प्रेरित करना चाहिए। संस्थागत ऋण को अनुकूल माहौल तैयार करना चाहिए। बैंकों को जटिल प्रक्रियाओं को सरल बनाना चाहिए। इस अवसर पर राज्य स्तरीय बैंकर्ज सम्मेलन के संयोजक और यूको बैंक के महाप्रबंधक विवेक कौल और भारतीय रिजर्व बैंक के प्रोफेसर सतीश वर्मा ने प्रस्तुति दी।
बैंकों के पास 1.05 लाख करोड़ रुपये जमा, कर्ज 37,400 करोड़ रुपये का दिया
अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त अनिल खाची ने कहा कि हिमाचल में बैंकों के पास 1.05 लाख करोड़ रुपये की जमा पूंजी है, जबकि इसमें केवल 37,400 करोड़ रुपये के ही ऋण हैं।
केवल 46.51 प्रतिशत परिवारों ने ही नए संस्थागत ऋणों का विकल्प चुना
सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि केवल 46.51 प्रतिशत परिवारों ने ही नए संस्थागत ऋणों का विकल्प चुना है। बाकी गैर संस्थागत कर्ज लिए जा रहे हैं।
एक लाख रुपये से कम के केसीसी ऋणों पर गारंटी लेने की जरूरत नहीं
भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार एक लाख रुपये से कम के केसीसी ऋणों पर गारंटी लेने की जरूरत नहीं है। बैंकों को केसीसी कवरेज बढ़ानी चाहिए। यह जानकारी देते हुए सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि जून 2018 तक बैंकों ने 6193.96 लाख रुपये के ऋ ण 4.34 लाख किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड योजना में दिए हैं।