रेणुका बांध परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ
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बहुचर्चित रेणुका बांध परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। इस प्रोजेक्ट से विस्थापित होने वाले 1142 परिवारों का बेसलाइन सर्वे (सामाजिक आंकलन) पूरा हो चुका है। वन अनुसंधान केंद्र (एफआरआई) देहरादून को इस बेसलाइन सर्वे को तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया था।
एफआरआई के विशेषज्ञों की टीम ने इस सर्वे को पूरा करके रिपोर्ट बांध प्रबंधन को सौंप दी है। एफआरआई के जलवायु विशेषज्ञ डॉ. धर्मानंद व परियोजना समन्वयक संदीप छेत्री ने वीरवार को रेणुका पहुंचकर बांध प्रबंधन को यह रिपोर्ट सौंपी। बांध की जद्द में रेणुका व पच्छाद क्षेत्र की 20 पंचायतों के 1142 परिवार पूर्ण रूप से विस्थापित होंगे।
बांध निर्माण के बाद इलाके के सौंदर्य में आएगा निखार
इनका सामाजिक आंकलन का कार्य भी अब पूरा हो चुका है। एफआरआई के विशेषज्ञ डॉ. धर्मानंद ने विशेष बातचीत में प्रस्तावित रिपोर्ट के कुछ पहलुओं का खुलासा करते हुए बताया कि जल बहाव का संतुलन बनाए रखने से रेणुका बांध निर्माण से किसी भी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। लेकिन यदि जल का बहाव कम होता है तो जलीय जीव व पौधों के अस्तित्व को खतरा हो सकता है।
उन्होंने बताया कि रेणुका डैम के निर्माण से पानी व पर्यावरण दोनों को स्थायी व संतुलित बनाए रखने की आवश्यकता है। बांध निर्माण के दौरान विशेष उपाय किए जाने चाहिए। रेणुका बांध परियोजना इलाके के लोगों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित व लाभकारी है।
हालांकि, बांध निर्माण के दौरान क्षेत्र के लोगों को प्रदूषण की मार झेलनी पड़ सकती है, लेकिन बांध निर्माण के बाद क्षेत्र की जलवायु, प्रकृति व सौंदर्य में भारी निखार आएगा। यह क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से भी काफी विकसित हो सकेगा। रेणुका बांध परियोजना के डीजीएम देशराज शर्मा ने एफआरआई के विशेषज्ञों द्वारा बेसलाइन सर्वे रिपोर्ट सौंपे जाने की पुष्टि की है।