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जमीन से बेदखली, सरकार पर गरजे किसान और बागवान

Wed, 04 May 2016 12:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 04 May 2016 12:01 AM IST
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CITU protest with farmar at hp secritariat shimla.
किसान नेताओं ने मांग उठाई कि 28 अगस्त 2015 को छोटे और गरीब किसानों की 10 बीघा तक सरकारी भूमि को नियमित करने के लिए विधानसभा में पारित संकल्प प्रस्ताव को लागू करें। - फोटो : अमर उजाला

प्रदेश सरकार की ओर से किसान और बागवानों को राहत न मिलने के आरोप में सेब उत्पादक संघ ने सीटू के बनैर तले मंगलवार को सचिवालय के समीप विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान संघ के पदाधिकारियों ने सेब के पेड़ कटान और बिजली, पानी के कनेक्शन काटे जाने पर प्रदेश सरकार को जिम्मेबार ठहराया। संघ का यह प्रदर्शन 24 घंटे तक चलेगा।

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मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे किसान पंचायत भवन में इकट्ठा हुए। उसके बाद वहां से नारेबाजी करते हुए किसान और बागवान दोपहर बाद डेढ़ बजे छोटा शिमला पहुंचे। जहां पर किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। धरना प्रदर्शन के दौरान करीब 15 मिनट तक सचिवालय के बाहर ट्रैफिक रोका गया, इससे जनता को भी परेशानी झेलनी पड़ी।
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धरने में अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय सह सचिव डा. बीजू कृष्णन भी विशेष तौर पर मौजूद रहे। सेब उत्पादक संघ के राज्य अध्यक्ष राकेश सिंघा कहा कि जब तक प्रदेश के गांव के लिए वन अधिकार समितियों का गठन न हो और किसानों के दावों का पूरी तरह से निपटारा न किया जा सके तब तक किसानों की जमीन से बेदखली नहीं होनी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि अभी तक 2002 में भू- राजस्व अधिनियम में जोड़े गए अनुच्छेद 163 के तहत भी जमीन संबंधी मामले लंबित पड़े हुए हैं और उनका निपटारा नहीं हुआ है। किसान नेताओं ने मांग उठाई कि 28 अगस्त 2015 को छोटे और गरीब किसानों की 10 बीघा तक सरकारी भूमि को नियमित करने के लिए विधानसभा में पारित संकल्प प्रस्ताव को लागू करें।


इसके अलावा सेब व अन्य फ लदार पेड़ों को काटना रोका जाए। किसानों के बिजली, पानी के कनेक्शनों को काटना बंद किया जाएं। वन व सरकारी भूमि में बनें लोगों के मकानों को तोड़ना बंद किया जाए। इसके अलावा राष्ट्रीय किसान आयोग की तर्ज पर प्रदेश में भी राज्य किसान आयोग का गठन किया जाएं और राष्ट्रीय किसान आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए।

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