सीटू कार्यकर्ताओं ने कार्य स्थलों और घरों की खिड़कियों-दरवाजों पर खड़े होकर किया प्रदर्शन
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कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन और कर्फ्यू के बीच नौकरियों में छंटनी और वेतन कटौती के खिलाफ मंगलवार को मजदूर संगठन सीटू ने प्रदेश भर में प्रदर्शन किया। कार्य स्थलों और घर की खिड़कियों-दरवाजों पर खड़े होकर सरकार के खिलाफ मजदूरों ने रोष जताया। प्रवासी मजदूरों को राशन न मिलने को लेकर भी नाराजगी जताई गई। सीटू की प्रदेश कार्यकारिणी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र भेजकर मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। सीटू की अखिल भारतीय कमेटी के आह्वान पर हिमाचल के 11 जिलों में सीटू ने कोरोना महामारी के दौर में मजदूरों को राशन उपलब्ध करवाने, सभी मजदूरों को 7500 रुपये की आर्थिक सहायता देने, नौकरियों में कर्मियों की छंटनी बंद करने की मांग की। चेतावनी दी कि अगर जरूरत पड़ी तो मजदूर सड़कों पर उतरकर आंदोलन का बिगुल बजा देंगे।
सीटू के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा और महासचिव प्रेम गौतम ने बताया कि प्रदेश भर में हुए प्रदर्शनों में सीटू कार्यकर्ताओं ने केंद्र व प्रदेश सरकार के कोरोना काल के स्वास्थ्य दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए हाथों में प्ले कार्ड व चार्ट पकड़कर अपनी मांगों को सरकार के समक्ष रखा। सभी जिलों में जिलाधीशों के माध्यम से प्रधानमंत्री को 15 सूत्रीय ज्ञापन भी सौंपा गया है। विजेंद्र मेहरा ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकारें इस महामारी के दौर में मजदूरों की रक्षा करने में पूरी तरह विफल रही हैं। मजदूरों को पेट भरने व जिंदा रहने के लिए राशन चाहिए लेकिन उन्हें राशन की जगह प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के भाषण ही नसीब हो रहे हैं।
प्रदेश के ज्यादातर उद्योगों में 22 मार्च के जनता कर्फ्यू के बाद ठेका मजदूरों को कोई वेतन नहीं दिया गया है। शिमला नगर निगम के टुटू स्थित ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र में साढ़े दस हजार रुपये वेतन लेने वाले मजदूरों को मार्च में केवल दो हजार रुपये वेतन दिया गया। केंद्र की 20 व 29 मार्च की अधिसूचनाओं का खुला उल्लंघन हो रहा है, जिसके अनुसार मजदूरों को समय पर बिना कटौती वेतन मिलना चाहिए।
हिमाचल में भी पूरे देश की तरह ही असंगठित क्षेत्र में कार्यरत मनरेगा व निर्माण मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। महासचिव प्रेम गौतम ने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों व अन्य मजदूरों के लिए पीपीई किट का प्रबंध किया जाए। श्रमिक कल्याण बोर्ड से जुड़े मजदूरों को चार हजार की राशि एकमुश्त तुरंत जारी की जाए। आउटसोर्स व ठेका मजदूरों के वेतन में कटौती बंद की जाए।