हिमाचल विस बाल सत्र: नशे के मुद्दे पर तपा विधानसभा का बाल सत्र, विपक्ष ने वेल में आकर की नारेबाजी
बाल मुख्यमंत्री जाह्नवी ने कहा कि नशे के बढ़ते कारोबार से हम भी दुखी हैं। इंतजार करें, जल्द ही व्यवस्था बदली जाएगी।
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सोमवार को बाल श्रम निषेध दिवस पर आयोजित बाल सत्र प्रदेश में नशे के बढ़ते प्रचलन पर खूब तपा। विपक्षी सदस्यों ने वेल में आकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। राज्य सरकार पर झूठे आश्वासन देने का आरोप लगाते हुए विपक्षी सदस्यों ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के जवाब पर असंतोष जताया।
वेल में पहुंचकर नारेबाजी करने पर विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्यों को फटकार लगाते हुए नियमों का हवाला दिया। इस अवसर पर बाल मुख्यमंत्री जाह्नवी ने कहा कि नशे के बढ़ते कारोबार से हम भी दुखी हैं। इंतजार करें, जल्द ही व्यवस्था बदली जाएगी। प्रश्नकाल के दौरान विपक्षी सदस्यों ने स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल और पेपर लीक से जुड़े मामले उठाकर सदन की कार्यवाही को खूब गरमाया।
विपक्षी सदस्य तनवी शर्मा ने पूछा कि प्रदेश में बच्चों में बढ़ रहे नशे के प्रयोग को कम करने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है। प्रदेश में कितने नशा मुक्ति केंद्र खोले गए हैं। जवाब में उपमुख्यमंत्री तुषार आनंद ने कहा कि प्रदेश में 91 नशा मुक्ति केंद्र हैं। जिला हमीरपुर में पांच, कांगड़ा में 15, बिलासपुर में 1, चंबा-किनौर-लाहौल स्पीति में 0, सिरमौर में चार, सोलन में 22, कुल्लू-मंडी में तीन-तीन, शिमला में 13 और ऊना में 25 नशा मुक्ति केंद्र हैं।
अनुपूरक सवाल करते हुए सदस्य साहिल कपूर ने पूछा कि शिमला, सोलन, सिरमौर, कांगड़ा में नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या अधिक क्यों है। जवाब में बाल मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊना, सोलन और कांगड़ा की सीमा पंजाब राज्य से लगती है। इन क्षेत्रों में चिट्टा की तस्करी अधिक है। शिमला राज्य का केंद्र है, यहां 13 केंद्र हैं। इस पर बाल नेता विपक्ष ने कहा कि अपनी नाकामयाबी के लिए सरकार कब तक खानापूर्ति करेगी।
खुद को बचाने के लिए सरकार सिर्फ एक-दो तस्करों को गिरफ्तार कर रही है। आज चिट्टा की बात ऐसी हो रही है जैसे मोमोज की बात हो। बच्चों को घरों से बाहर निकालने से अभिभावक डर रहे हैं। झूठे आश्वासनों से सरकार प्रदेश की जनता को कब तक बेवकूफ बनाएगी। बाल सीएम ने इस बारे में ठोस कार्यवाही की मांग करती हूं।
यह आश्वासन की सरकार
विपक्षी सदस्यों ने अपनी सीट से उठकर कहा कि यह आश्वासन की सरकार है। बच्चों के भविष्य से सरकार खिलवाड़ कर रही है। बाल विधानसभा अध्यक्ष लविश नेगी ने सदस्यों को शांत करते हुए बाल सत्र की कार्यवाही को स्थगित करने की चेतावनी दी। माहौल शांत होने पर बाल मुख्यमंत्री ने कहा कि नेता विपक्ष को मेरा जवाब चाहे खानापूर्ति लगे, लेकिन हम नशे के खिलाफ सख्ती से निपटने का कार्य कर रहे हैं।
नियम 324 के तहत उठाए ये मुद्दे
बाल विधायक आदित्य ने मामला उठाया कि हमारे प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था दो स्तर पर देखते हैं। एक जिला स्तर पर। पर तहसील और ग्रामीण स्तर पर कई खामियां हैं। कहीं पीएचसी नहीं है तो कहीं चिकित्सक नहीं हैं। जहां चिकित्सक हैं, वहां उपकरण नहीं हैं। वह सदन के माध्यम से बताना चाहते हैं कि तीव्र गति से ग्रामीण क्षेत्रों तक दवाएं पहुंचाई जानी चाहिए।
श्रीकृष्णा ने कहा कि शिमला, कुल्लू, कसोल जैसे पर्यटन स्थलों के अलावा पर्यटन की नई संभावनाएं खोली जानी चाहिए। सेब के बगीचों में कृषि पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। विभाग के अधिकारियों की टीम गठित कर इस सुझाव पर काम करें। उत्तराखंड में स्वास्थ्य पर्यटन से 1000 करोड़ रुपये की आमदनी हो रही है।
बाल विधायक नीतिका चौहान ने कहा कि वह कानून के सरलीकरण के लिए प्रस्ताव पेश किया जाएगा। वह बच्चों और नागरिकोें के लिए ऐसी टैक्स्ट वीडियो बनाई जाए, जिससे उन्हें भारत के कानूनों के बारे में जानकारी दी जा सके। इस सुविधा से लोगों को कानून समझने में आसानी होगी।
बाल विधायक प्रतिभा सिंह ने मुद्दा उठाया कि भारत में बढ़ती जनसंख्या विकास में बाधा है। ज्यादा जनसंख्या से संसाधनों की कमी का होना स्वाभाविक है। जनसंख्या को घटाना समय की मांग है। इस बारे में विचार किया जाना चाहिए।
ईवा भारद्वाज ने सत्ता पक्ष को सुझाव दिए कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में सत्ता पक्ष को सुझाव देना चाहती हैं। उनके क्षेत्र में कई छोटे और बड़े बिजली प्रोजेक्ट काम कर रहे हैं। यहां के कई सदस्यों ने किन्नौर में हुए भूस्खलन की घटनाओं के बारे में सुना होगा। हाइडल प्रोजेक्ट के स्थान पर सोलर पॉवर प्रोजेक्ट लगाए जाएं। दूसरा सुझाव यह है कि सोलर पॉवर को जनसाधारण तक पहुंचाने के लिए उपदान को बढ़ाया जाना चाहिए। पहले से चल रहे हाइड्रो प्रोजेक्टों का ठीक से रखरखाव करे। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में सोलर पॉवर को विकसित करने पर ध्यान देने की जरूरत है।
बाल विधायक अरुणोदय शर्मा ने कहा कि एक समाज का विकास तभी संभव है, जब समाज के सभी वर्गों का ध्यान रखा जाए। उन्होंने प्रदेश में विशेष रूप से सक्षम बच्चों के कल्याण के लिए कार्य करने का मुद्दा उठाया।
बाल विधायक अक्षरा ठाकुर ने मुद्दा उठाया कि प्रदेश में सड़कों की स्थिति ठीक नहीं है। राज्य में सड़कों की व्यवस्था को दुरुस्त किया जाना चाहिए। राज्य में सड़कें ठीक हाेंगी तो इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।