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राजधानी में वायरल फीवर की चपेट में स्कूली बच्चे
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डीडीयू में हर रोज पहुंच रहे 130 केस
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी शिमला में स्कूली बच्चे वायरल फीवर की चपेट में आ रहे हैं। दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल (डीडीयू) में सामान्य दिनों की अपेक्षा इलाज के लिए आए बच्चों की संख्या बढ़ी है।
हर रोज औसतन 130 बच्चे बुखार और गला खराब की शिकायत लेकर अस्पताल इलाज करवाने आ रहे हैं। डीडीयू के बालरोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश राणा ने बताया कि मौसम बदलने से बुखार के मामले बढ़े हैं। संक्रमण के चलते यह एक से दूसरे बच्चे में फैल रहा है। इससे सर्वाधिक बच्चे ही प्रभावित हो रहे हैं। अभिभावकों को चाहिए कि बुखार और जुकाम पीड़ित बच्चों को स्कूल न भेजें। उपचार लेने के बाद ही बच्चों को स्कूल भेजें ताकि यह संक्रमण दूसरे बच्चों में न फैलें।
आइसक्रीम और ठंडे पानी का न करें इस्तेमाल
बालरोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश राणा ने कहा कि बच्चे आजकल आइसक्रीम और ठंडे पानी का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इससे बुखार और जुकाम बार-बार होता है। इसलिए इन पदार्थों का इस्तेमाल न करें। फ्रिज का पानी भी कम इस्तेमाल करें। हाथों को बार-बार साफ करते रहें। बुखार अधिक आए तो अस्पताल में इलाज करवाने आएं। विटामिन सी युक्त पदार्थों, हरी सब्जियों और उबले पानी का इस्तेमाल करें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी शिमला में स्कूली बच्चे वायरल फीवर की चपेट में आ रहे हैं। दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल (डीडीयू) में सामान्य दिनों की अपेक्षा इलाज के लिए आए बच्चों की संख्या बढ़ी है।
हर रोज औसतन 130 बच्चे बुखार और गला खराब की शिकायत लेकर अस्पताल इलाज करवाने आ रहे हैं। डीडीयू के बालरोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश राणा ने बताया कि मौसम बदलने से बुखार के मामले बढ़े हैं। संक्रमण के चलते यह एक से दूसरे बच्चे में फैल रहा है। इससे सर्वाधिक बच्चे ही प्रभावित हो रहे हैं। अभिभावकों को चाहिए कि बुखार और जुकाम पीड़ित बच्चों को स्कूल न भेजें। उपचार लेने के बाद ही बच्चों को स्कूल भेजें ताकि यह संक्रमण दूसरे बच्चों में न फैलें।
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आइसक्रीम और ठंडे पानी का न करें इस्तेमाल
बालरोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश राणा ने कहा कि बच्चे आजकल आइसक्रीम और ठंडे पानी का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इससे बुखार और जुकाम बार-बार होता है। इसलिए इन पदार्थों का इस्तेमाल न करें। फ्रिज का पानी भी कम इस्तेमाल करें। हाथों को बार-बार साफ करते रहें। बुखार अधिक आए तो अस्पताल में इलाज करवाने आएं। विटामिन सी युक्त पदार्थों, हरी सब्जियों और उबले पानी का इस्तेमाल करें।
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