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सरकार की लापरवाही से हिमाचल को बड़ा झटका

Thu, 08 Jan 2015 09:23 AM IST
Updated Thu, 08 Jan 2015 09:23 AM IST
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Center's grant for Kideny transplant centre in IGMC shimla lapse.

केंद्र सरकार ने हिमाचल को बड़ा झटका दिया है। सरकारी अमले की लापरवाही के चलते हिमाचल में किडनी ट्रांसप्लांट का सपना पूरा नहीं हो पा रहा है। किडनी ट्रांसप्लांट सेंटर को एक करोड़ 62 लाख रुपये जारी होने के बावजूद सूबे का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संस्थान आईजीएमसी इसे स्थापित नहीं कर सका। इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्टाफ की कमी जैसी वजह बताकर आईजीएमसी प्रशासन ने इसे चलाने से हाथ खड़े कर दिए हैं।

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नतीजतन, दो साल बाद सरकार ने यह राशि ब्याज सहित वापस ले ली है। हिमाचल में कहीं भी किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा नहीं है। मरीजों को बाहरी राज्यों का रुख करना पड़ता है। किडनी ट्रांसप्लांट से पहले राज्य स्तरीय कमेटी से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लेना जरूरी होता है।

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पांच लाख तक का खर्च

Center's grant for Kideny transplant centre in IGMC shimla lapse.

एक लंबी प्रक्रिया से मरीज को गुजरना होता है। इलाज पर कम से कम पांच लाख का खर्च होता है। इसके लिए लोगों को चंडीगढ़, ‌दिल्‍लीए गुड़गांव जाना पड़ता है। आर्थिक तौर पर संपन्न व्यक्ति तो बड़े निजी अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट करवा लेते हैं, लेकिन गरीब लोग पैसों के अभाव में इलाज से वंचित रह जाते हैं।

इसी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने करीब दो वर्ष पहले आईजीएमसी में किडनी ट्रांसप्लांट सेंटर स्थापित करने की घोषणा की थी। साथ ही नेशनल हेल्थ मिशन के तहत 1.62 करोड़ रुपये भी जारी कर दिए थे। लेकिन आईजीएमसी प्रबंधन ने इस पर कोई गंभीरता नहीं दिखाई। इससे किडनी ट्रांसप्लांट के लिए लोगों को अभी दूसरे राज्यों में भटकना पड़ेगा।

एनओसी लेने की जटिल प्रक्रिया

Center's grant for Kideny transplant centre in IGMC shimla lapse.

किडनी ट्रांसप्लांट न करने के ये दिए तर्क-अस्पताल में जगह की कमी बताई गई। अलग से ऑपरेशन थियेटर नहीं है। स्टाफ की भारी कमी है। अलग से टेस्ट लैब नहीं। प्रशिक्षित स्टाफ भी नहीं है। हिमाचल के लोगों को किडनी ट्रांसप्लांट करवाने के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है, लेकिन दूसरी जगह ट्रांसप्लांटेशन आसानी से नहीं होता।

देश के किसी भी कोने में ट्रांसप्लांटेशन करवाना हो तो संबंधित व्यक्ति को उससे पहले आईजीएमसी में बनी कमेटी से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना जरूरी है। इसके बिना किडनी ट्रांसप्लांट संभव नहीं है, लेकिन एनओसी लेने में इतनी औपचारिकताएं होती हैं कि इनमें महीने से भी ज्यादा का समय लग जाता है।

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दो साल बीते लेकिन कुछ नहीं बना

Center's grant for Kideny transplant centre in IGMC shimla lapse.

आईजीएमसी के प्रिंसिपल प्रोफेसर एसएस कौशल का कहना है कि किडनी ट्रांसप्लांट सेंटर के लिए आया पैसा सरकार को लौटा दिया है। जगह की कमी की वजह से ऐसा करना पड़ा। सुपर स्पेशियलिटी के लिए अलग से बहुमंजिला भवन बनने के बाद वहां किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू कर दी जाएगी।

एनएचएम के निदेशक हंसराज शर्मा ने बताया कि डेढ़ करोड़ रुपये जारी करने के बाद भी आईजीएमसी प्रशासन किडनी ट्रांसप्लांट सेंटर स्थापित नहीं कर सका। दो साल बाद गवर्निंग बॉडी के निर्देश पर आईजीएमसी प्रशासन ने ये राशि लौटा दी है। इसका इस्तेमाल आईजीएमसी के लिए नए उपकरण खरीदने में किया जाएगा।

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