अल्पसंख्यक छात्रों की स्कॉलरशिप पर केंद्र ने चलाई कैंची
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अल्पसंख्यक बच्चों को मिलने वाली छात्रवृत्ति पर कैंची चली है। पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों को मिलने वाली छात्रवृत्ति 5700 से घटाकर 1000 रुपये कर दी गई है। प्राइवेट स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चों को केंद्र सरकार ने यह झटका दिया है।
सरकारी स्कूलों के छात्रों को पहले की तरह 1000 रुपये छात्रवृत्ति मिलती रहेगी। छात्रवृत्ति पर चली कैंची से बच्चों के अभिभावकों में रोष है। इधर, शिक्षा विभाग का कहना है कि केंद्र सरकार ने जो बजट जारी किया है उसी हिसाब से आवंटित किया गया है।
इस योजना को केंद्र की के अल्पसंख्यक विकास मंत्रालय के माध्यम से संचालित किया जाता है। योजना में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले पहली से दसवीं तक के छात्रों को एक हजार रुपये तथा निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को 5700 रुपये छात्रवृत्ति दिए जाने का प्रावधान है।
स्कॉलरशिप के नाम पर दिए गए महज हजार रुपए
लेकिन इस बार जब 2014-15 की छात्रवृत्ति हजारों बच्चों के खातों में प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर की तो अभिभावक यह देख कर हैरान हो गए कि छात्रवृत्ति में करीब 83 फीसदी कटौती हो गई।
प्राथमिक तक के निजी स्कूलों के बच्चों को मिलने वाली 5700 की छात्रवृत्ति इस बार महज एक हजार ही मिली। इससे बच्चे भी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। अभिभावक अमरेंद्र सिंह, सतनाम सिंह, फिरोज खान, रहमान, शरीफ मोहम्मद ने बताया कि अल्पसंख्यक बच्चों की छात्रवृत्ति में कटौती साबित करती है कि सरकार इस वर्ग के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपना रही है।
राज्य अल्पसंख्यक, दलित सोशल रिफार्म के प्रदेशाध्यक्ष एजी शेख तथा ऑल हिमाचल सिख वेलफेयर सभा के महासचिव सर्वजीत सिंह ने प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। इधर, मंडी में तैनात उप निदेशक प्रारंभिक शिक्षा केडी शर्मा से इस बारे संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि जो राशि केंद्र से मिलती है उसे छात्रों के खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है।