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Irrigation Project: नूरपुर में बनने वाले फिन्ना सिंह सिंचाई प्रोजेक्ट को मंजूरी, केंद्र देगा 343 करोड़
Wed, 19 Jul 2023 10:58 AM IST
Krishan Singh
धर्मेंद्र पंडित, शिमला
धर्मेंद्र पंडित, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Wed, 19 Jul 2023 10:58 AM IST
सार
प्रदेश के जिला कांगड़ा के विधानसभा क्षेत्र नूरपुर के लिए राहत भरी खबर है। यहां बनने वाले फिन्ना सिंह सिंचाई प्रोजेक्ट को केंद्र जल आयोग ने मंजूरी दे दी है। प्रदेश सरकार ने मजबूती के साथ केंद्र में अपना पक्ष रखा है।
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सिंचाई प्रोजेक्ट(सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के विधानसभा क्षेत्र नूरपुर के लिए राहत भरी खबर है। यहां बनने वाले फिन्ना सिंह सिंचाई प्रोजेक्ट को केंद्र जल आयोग ने मंजूरी दे दी है। प्रदेश सरकार ने मजबूती के साथ केंद्र में अपना पक्ष रखा है। इस प्रोजेक्ट पर 343 करोड़ रुपये और खर्च होंगे। केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए पैसा देने की हामी भरी है।
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इसका काम वर्ष 2011 में शुरू हो गया था। बजट की कमी के चलते यह परियोजना लटक गई। मौके पर 60 फीसदी पूरा हो चुका है। पहले इस प्रोजेक्ट पर 204 करोड़ रुपये की राशि खर्च होने का अनुमान था। लेकिन इसको विस्तार दिए जाने से अब 700 करोड़ रुपये से ज्यादा राशि खर्च होगी। इस प्रोजेक्ट पर भाजपा और कांग्रेस पार्टी के नेताओं में खूब सियासत होती रही है। विधानसभा में भी कई बार यह मामला गूंजा है।
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हजारों लोगों को होगा लाभ
इस सिंचाई परियोजना से नूरपुर के हजारों लोगों को फायदा होगा। चार हजार हेक्टेयर भूमि पर लोग खेती कर सकेंगे। बता दें कि अभी तक इस क्षेत्र के ज्यादातर किसान बारिश पर ही निर्भर हैं। लेकिन, सरकार की ओर से अब यहां पर एक बांध भी बनाए जाने की योजना है। इसका भी 35 कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इस बांध से 1.88 मेगावाट बिजली बनाना प्रस्तावित है। वहीं, बांध में अतिरिक्त पानी डालने के लिए डायवर्सन वेयर, लिंक कनाल, टनल और मेन कनाल आदि कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं।
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बांध और सिंचाई वितरण के लिए बन रही नहरों का निर्माण कार्य लगभग हो चुका है। बांध को बड़ा बनाए जाने के चलते इस महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजना की लागत बढ़ गई है। ऐसे में विभाग ने नई डीपीआर बनाकर स्वीकृति के लिए केंद्रीय जल आयोग के पास भेजी गई थी। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि परियोजना की अनुमानित लागत 737 करोड़ के करीब है।केंद्रीय जल आयोग के पास भेजा गया था, इसे मंजूरी मिल गई है। हिमाचल के लिए यह गर्व की बात है।