{"_id":"03eb592329bcac8034ee3d6841eb3be1","slug":"cd-case-central-govt-not-given-permisssion-in-cd-case-inquiry","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सीडी केस : केंद्र-प्रदेश सरकार आमने सामने!","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीडी केस : केंद्र-प्रदेश सरकार आमने सामने!
Updated Sat, 28 Jun 2014 11:57 PM IST
विज्ञापन
वीरभद्र सिंह सीडी केस में हिमाचल के पूर्व डीजीपी व आईपीएस डा. डीएस मन्हास के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की तैयारी कर रहे गृह विभाग को केंद्र सरकार की आपत्तियों ने उलझा दिया है।
विज्ञापन
मन्हास के खिलाफ कार्रवाई की मंजूरी के लिए गृह विभाग ने करीब ढाई महीने पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय को केस भेजा था, लेकिन मंजूरी के बजाय इस पर दिल्ली से बार-बार आपत्तियां लग रही हैं।
विज्ञापन
दिल्ली में मोदी सरकार बनने के बाद अब ताजा क्लेरिफिकेशन मांगी गई है कि राज्य सरकार बताए कि इस केस में मन्हास निजी तौर पर कैसे जिम्मेदार हैं? मोदी सरकार बनने के बाद से अब इस केस में मन्हास के खिलाफ जांच की अनुमति मिलने की विजिलेंस को कम ही उम्मीद लग रही है।
विज्ञापन
Trending Videos
वीरभद्र सीडी केस में गड़बड़ी का लगा आरोप
गृह विभाग अब इस केस में जवाब तैयार करने में उलझा हुआ है। राज्य में कांग्रेस सरकार बनने के बाद वीरभद्र सिंह पर पूर्व सरकार के दौरान बने सीडी केस की दोबारा से जांच हुई। इस जांच के बाद विजिलेंस ने मन्हास के खिलाफ विभागीय जांच की सिफारिश की थी।
आईपीएस अफसर मन्हास चूंकि रिटायर हो चुके थे, इसलिए उन्हें चार्जशीट करने से पहले भी केंद्रीय गृह मंत्रालय से अनुमति जरूरी है।
मन्हास पर आरोप था कि वीरभद्र सिंह के खिलाफ जबरदस्ती केस तैयार करने के लिए उन्होंने सीडी पर चंडीगढ़ लैब से आई रिपोर्ट को कोर्ट से छिपाया और केस के दो अहम गवाहों कपिल मोहन और पीसी जैन के झूठे बयान दर्ज किए। ये दोनों गवाह भी मान चुके हैं कि उन्होंने कोई बयान दर्ज ही नहीं करवाए थे।
आईपीएस अफसर मन्हास चूंकि रिटायर हो चुके थे, इसलिए उन्हें चार्जशीट करने से पहले भी केंद्रीय गृह मंत्रालय से अनुमति जरूरी है।
मन्हास पर आरोप था कि वीरभद्र सिंह के खिलाफ जबरदस्ती केस तैयार करने के लिए उन्होंने सीडी पर चंडीगढ़ लैब से आई रिपोर्ट को कोर्ट से छिपाया और केस के दो अहम गवाहों कपिल मोहन और पीसी जैन के झूठे बयान दर्ज किए। ये दोनों गवाह भी मान चुके हैं कि उन्होंने कोई बयान दर्ज ही नहीं करवाए थे।